गरिमा

जैसे लोग डायन बताकर मार देते हैं वैसे काला जादू का आरोप लगाकर एंकर आजकल चरित्र-हनन करते हैं।

रिया और सुशांत का रिश्ता सिर्फ़ सुशांत का रिश्ता नहीं है. उसमें दोनों की बातें हैं. सुशांत की मौत का ज़िम्मेदार रिया को ठहराना सदियों पुराने डायन-प्रथा के ज़िंदा होने का सुबूत देता है। इस प्रैक्टिस में पति या बच्चों की मौत का ज़िम्मेदार औरत को बना दिया जाता था। समाज तुरंत हरकत में आता था. आसपास के लोग जुट कर उस औरत की पिटाई करते थे। उसे मार मार कर मौत की घाट उतार देते थे।

विडम्बना ये है कि आज वही प्रथा बड़े पैमाने पर खूब धूम धाम से नैशनल टेलिविज़न पर दिखाया जा रहा है.

एक तो मेंटल हेल्थ पर बात ही नहीं होती है. सुशांत की मौत के बाद थोड़ी-बहुत बात हो रही थी. उसको ना जाने TV और कंगना जैसे तमाम लोगों ने मिलकर कहाँ धकेल दिया. एक तो सरकार पहले ही नहीं चाहती कि संवेदनशील मुद्दों पर बात भी हो. अगर बात होती तो ख़ुद सरकारी आँकड़े ही देश की दुर्गति बयान करते।

स्वास्थ को भारत की कुल जीडीपी का कमोबेश 1 प्रतिशत ही मिलता है. देश की लगभग 18 करोड़ जनता मेंटल हेल्थ क्राइसिस से जूझ रही है. ऐसे में, मेंटल हेल्थ के लिए जो रक़म मुहैय्या है, वो स्वास्थ को मिलने वाले फंड का सिर्फ़ 0.5% है. कह सकते हैं कि सरकार ऊँट के मुँह में ज़ीरा डाल रही है. साल 2018-19 में ये ज़ीरा Rs 50 करोड़ था, जो वर्ष 2019-20 में घटकर Rs 40 करोड़ हो गया।

जैसे ही लोगों में संवेदनशीलता घर बनाने लगती है उनको बावलेपन की और धकेल दिया जाता है। उनसे उनका दिल छीनकर उनकी प्रोग्रामिंग कर दी जाती है। कुछ-कुछ वक्त में ग़ुस्से की गेंद थमा दी जाती है और गोदी मीडिया पाला तैयार करता है फिर ग़ुस्से की वो गेंद सीमारेखा से दौड़ते हुए आकर फेंकी जाती है। एक के बाद एक, संवेदनशीलता की विकेट गिरती रहती है।

रिया, सुशांत की प्रेमिका थीं। कुछ तो बात होगी ना उस लड़की में जो सुशांत को उससे प्यार हुआ। आज सुशांत के तथाकथित फ़ैन, सुशांत से प्यार का दावा करते हैं. इस दावे के साथ-साथ, ये फ़ैन, उस औरत को चोट पहुँचा रहे हैं, बलात्कार और जान के मारने की धमकी दे रहे हैं जिससे सुशांत प्यार करता था ऐसी विडम्बना नहीं देखी। जिस लड़की का नाम सुशांत लिए इतना अज़ीज़ था कि उसने अपने ड्रीम प्रोजेक्ट का नाम उसके नाम पर रखा, आज उसी सुशांत के अपने प्रदेश में उस लड़की के नाम के आगे भद्दी-भद्दी गालियाँ लिख कर अश्लील गाने बनाए जा रहे हैं. और हद्द तो तब है कि सुशांत के फ़ैन होने का दावा करने वाले लोग उन गानों पर थिरक रहे हैं।

स्ट्रगल को स्ट्रगल नहीं समझते लोग. इनके लिए स्ट्रगल तभी मायने रखता है, जब वो स्ट्रगल कामयाबी में बदल जाए। रिया ख़ुद भी स्ट्रग्लिंग हैं. आज उनको सक्सेस नहीं मिल रही तो लोग उन्हें “गोल्ड-डिगर” और लालची बोल रहे हैं। उसे अपने अज़ीज़ की मौत का सोग भी नहीं मनाने दिया गया। रिया को इतनी मोहलत नहीं दी गई कि वो सुशांत की यादों को सहेज सके. ये हिंसा है. यहाँ, ये मानना बिलकुल सही होगा कि अगर आप उस इंसान की इज़्ज़त नहीं कर सकते जिससे वह प्यार करता था तो आप सुशांत की भी बेइज़्ज़ती कर रहे हैं।

ऐसी ही बेइज़्ज़ती बिहार के एक डीजीपी ने ने भी की. इन साहब ने पूछा था—“रिया चक्रवर्ती की औक़ात क्या है?” शायद जनाब नहीं जानते थे कि बिहार को मेंटल हेल्थ क्राइसिस में बुरा पर्फ़ॉर्म करने के लिए फटकार लगी थी।
इन महाशय ने अफ़सर बनने की योग्यता को नए रूप में परिभाषित किया. नीली बत्ती का लालच रखने वाले युवाओं को अब तक लगता था कि गाली-गलौज करके सिर्फ़ नेता ही बना जा सकता है। युवाओं को नए सिरे से प्रेरित करने का श्रेय इन डीजीपी को ज़रूर मिलना चाहिए।

रिया और सुशांत का रिश्ता कैसा था इस बात से पता लगता है जब NDTV की ऐंकर उन्हीं डीजीपी के शब्दों को दोहराते हुए रिया से पूछतीं है —“रिया चक्रवर्ती की औक़ात क्या है?” तब जवाब में रिया कहती हैं, “मेरी औक़ात यह है कि सुशांत सिंह राजपूत, जिससे आज इतने सारे लोग प्यार करते हैं वह मुझसे प्यार करता था.” ऐसा नहीं है कि ये पहली बार हुआ है। देश को असल मुद्दे से भटकाने के लिए महिलाओं का चरित्र-हनन करना एक आम बात हो गयी है. ये पैंतरा इस देश में कितना कारगर है इसका प्रमाण इस बात से ही मिल जाता है कि एक अरसे बाद देश की राजनीति में पैर ज़माने के लिए भाजपा ने इसी का इस्तेमाल किया।

आज TV STUDIO के पर्दों पर चलने वाली हेड्लाइंस ही अंतिम सत्य बन गयी हैं. गिनती के शब्दों से बनी इन हेड्लायंस के ज़रिए आज लोगों की ज़िंदगी के फ़ैसले होते हैं। ये TV ऐंकर्स दिन-रात चिल्ला चिल्ला कर रिया को एक मुद्दा बनाए हुए हैं. उनके घर खाना लेकर आए बंदे को ख़ौफ़ज़दा कर दिया. मतलब, ये टुच्चे पत्रकार रिया का बीड़ी-पानी बंद करने पर उतर आए।

इस मुद्दे पर सुशांत के घर वालों ने ज़रा भी अच्छे क़दम नहीं उठाए. उन्होंने भी सुशांत को नहीं समझा. सुशांत के साइयंटिफ़िक माइंडसेट से हम लोग रूबरू हैं. उनके अच्छे दिल से भी हम वाक़िफ़ हैं. आज उसी की पार्ट्नर को ये बोला जा रहा है कि उसने सुशांत पर काला जादू कर दिया. ये तमाम इल्ज़ाम सिर्फ़ औरतों पर ही लगते हैं।

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