yogi adityanath
Yogi Adityanath

अखिलेश यादव के कार्यकाल (2012-17) को बीजेपी यादवों की सरकार कहती रही है और इसका प्रचार मीडिया ने भी खूब किया। लेकिन अखिलेश पर आरोप लगाने वाली बीजेपी ख़ुद जातिवाद से अछूती नहीं है। सूबे में बीजेपी की योगी सरकार जमकर सरकारी महकमों में ब्राहमणों की नियुक्तियां कर रही है।

दरअसल, बुधवार को योगी सरकार की तरफ़ से उन्नाव जिले में शासकीय अधिवक्ताओं की 9 नियुक्ति की गई हैं। इन 9 पदों में 8 नियुक्तियां ब्राहमण जाति से की हैं, जबकि एक नियुक्ति कायस्थ जाति से की गई है। ओबीसी, एससी/एसटी और अल्पसंख्यकों का नामों निशान तक नहीं है। इसके बाद भी पूरी बीजेपी के बड़े नेता और योगी सरकार ‘महात्मा’ बनकर मीडिया के सामने बयान दे देंगे कि हमारी सरकार न जातिवाद करती है और न जातिवाद को बढ़ावा देती है। सच्चाई तो ये है कि बीजेपी की सरकार में जमकर जातिवाद किया जा रहा है।

उन्नाव में नियुक्त किए गए अधिवक्ताओं के नाम शैलजा शरण शुक्ला (जिला शासकीय अधिवक्ता राजस्व), योगेन्द्र कुमार तिवारी (जिला शासकीय अधिवक्ता राजस्व), विनोद कुमार त्रिपाठी (जिला शासकीय अधिवक्ता दीवानी), चन्द्रिका प्रसाद वाजपेयी (अपर जिला शासकीय अधिवक्ता दीवानी), प्रशांत त्रिपाठी (सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता दीवानी), अनिल त्रिपाठी (जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी), प्रदीप श्रीवास्तव (सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी), हरीश अवस्थी (सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी) और विनय शंकर दीक्षित ( सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी) हैं।

ख़ुद जाति के आधार पर लोगों की नियुक्तियां करने वाली बीजेपी पूर्ववर्ती अखिलेश यादव सरकार पर जातिवाद के आरोप लगाती रही है। पिछले साल बीजेपी की तरफ़ से प्रोपेगंडा फैलाया गया था कि सूबे के ज़्यादातर थानों में अखिलेश सरकार ने यादव जाति के लोगों को थानाध्यक्ष नियुक्त किया। हालांकि जब इस दावे की पड़ताल की गई तो ये दावा ग़लत पाया गया। जब राजधानी लखनऊ के ही 46 थानों को देखा गया तो वहां एक भी थाने में यादव जाति से थानाध्यक्ष नहीं था।

योगी सरकार में जातिवाद को लेकर सपा अध्यक्ष अखिलेश ने लोकसभा चुनाव के दौरान अपने भाषण में कहा था कि, “हमपर BJP ने आरोप लगाया कि हमारी सरकार ने भेदभाव किया था। बीजेपी ने कहा था कि ये यादवों की सरकार है। लेकिन योगी सरकार में इस समय एक भी डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर (DM) और एसपी यादव नहीं हैं। बीजेपी से बड़ी जातिवादी पार्टी इस देश में कोई नहीं है। जिसने जाति और धर्म में बांटा। जैसे अंग्रेज करते थे वैसे ही बीजेपी बांटो और राज करो करती है।“

ये हैरान करने वाली बात है कि यूपी में इतनी बड़ी आबादी वाली ओबीसी जातियों में से एक (यादव जाति) के एक भी यादव डीएम और एसपी नहीं हैं!

एक सवाल यहां बनता है कि अगर अखिलेश सरकार में इतने सारे यादव डीएम और एसपी थे तो अब योगी सरकार में ये कहाँ गए? क्या BJP की योगी सरकार ने जातिगत भेदभाव करते हुए उन्हें हटा दिया? अगर इस जाति के अधिकारी नहीं है तो अब यूपी में योगी सरकार में किस जाति के डीएम और एसपी मौजूद हैं?

गौरतलब है कि अखिलेश सरकार में बीजेपी ने प्रोपेगेंडा फैलाकर आरोप लगाया था कि उन्होंने 86 एसडीएम में से 56 यादवों की भर्ती की है। लेकिन बाद में बीजेपी का ये आरोप झूठा साबित हुए था।

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