पिछले 2 महीने से देशभर के किसान दिल्ली बॉर्डर पर जमा हुए हैं और केंद्र सरकार को ललकार रहे हैं कि नए बने कृषि कानूनों को अगर वापस नहीं लिया गया तो सरकार को ही नहीं इस समूची पूंजीवादी व्यवस्था को बड़ा भुगतान करना पड़ेगा।

शुरुआती दौर में किसानों की इस चेतावनी को हल्के में लेने वाली सरकार दिसंबर के आखिर तक गंभीर होती गई और जनवरी में तो एकदम बैकफुट पर दिख रही है क्योंकि दिल्ली के इर्द-गिर्द चल रहे किसान आंदोलन का इतना तेजी से विस्तार हुआ कि उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, बिहार समेत तमाम राज्यों के किसान धीरे-धीरे सड़कों पर आना शुरू हो गए।

किसान आंदोलन की इस व्यापक विस्तार को देखते हुए योगी सरकार भी सकते में है और हर संभव कोशिश कर रही है कि किसान आंदोलन को गांव-गांव, घर-घर पहुंचने से किसी भी तरह रोका जाए।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आह्वान किया है कि 26 जनवरी को होने वाले ट्रैक्टर मार्च का वो समर्थन करते हैं और प्रदेश भर में लाखों समाजवादी कार्यकर्ता तहसील स्तर पर ट्रैक्टर मार्च करेंगे, इसके साथ ही ही अन्य विपक्षी दलों ने भी किसान आंदोलन का समर्थन किया है।

किसान आंदोलन की बढ़ती हुई पैठ को देखते हुए योगी सरकार अब तमाम किसान नेताओं को नोटिस भेजते हुए धमकी दे रही है कि आगामी विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए तो सख्त कार्यवाही की जाएगी।

नोटिस में लिखा गया है कि आने वाले दिनों में आप लोग ऐसे विरोध प्रदर्शन आयोजित करने जा रहे हैं जिससे कानून व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए आप लोगों को सचेत किया जा रहा है कि ऐसा न करें नहीं तो कानूनी कार्यवाई की जाएगी।

सरकार की इस तरह की नोटिस पाने वाले में शामिल किसान नेता लाल सिंह कहते हैं- “मैं किसान हूं और दुनिया में किसानों के खिलाफ किसी भी अत्याचार का विरोध करता हूं।

तानाशाह सरकार हमें हमारे हक के लिए खड़ा नहीं होने दे रही है। डराने- धमकाने पर उतारू ये सरकार ये भूल रही है कि ये देश संविधान से चलता है और हमारा संविधान हमें अपने हक के लिए लड़ने की इजाजत देता है।

ये हमारे अस्तित्व की लड़ाई है कल का भारत कैसा होगा ये उसकी लड़ाई है। सरकारी तंत्र में इतनी ताकत नहीं है कि हमें रोक ले। मैं संकल्प लेता हूं कि मैं 26 जनवरी को किसान परेड में शामिल होऊंगा।

ऐसे ही सीतापुर के अन्य किसान नेताओं, जिसमें चन्ना सिंह उर्फ गुरुचरण सिंह और हरभजन सिंह शामिल हैं, उन्हें भी नोटिस दी गई है।

इन सभी किसान नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकार की तानाशाही भरी इस चेतावनी को वो मानने से इंकार करते हैं और आगामी विरोध प्रदर्शन दिवस पर ट्रैक्टर मार्च में शामिल होंगे।

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