यूपी में योगी सरकार के कार्यकाल में राज्य के विकास के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। इतने बड़े-बड़े दावों के बीच फिरोजाबाद से एक ऐसी खबर सामनें आई है, जिसने सरकार के जनता को बेसिक सुविधाएं देने के सभी दावों की असलियत को सामने ला दिया है।

उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद के एक सरकारी अस्पताल के बाहर का एक वीडियो बहुत तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें निकिता कुशवाहा नाम की एक लड़की आगरा के कमिश्नर की गाड़ी के सामने लेट जाती है और अधिकारी से ड़ेगू से जूझ रही अपनी 11 वर्षीय बहन वैष्णवी कुशवाहा को बचाने की गुहार लगाती है।

हालांकि उसकी बहन की अपील अंततः व्यर्थ थी। इस अपील के कुछ घंटे बाद ही उसकी मौत हो गई।

निकिता का आरोप है कि उनकी बहन को उचित इलाज न मिलने से उसकी मौत हुई है और उन्होंने डॉक्टरों को निलंबित करने और उनके कार्यों की जांच की मांग की।

इस पूरे मामलें पर अस्पताल प्रशासन का कहना है कि बच्ची को बचाने के लिए हर संभव कोशिश की गई।

वहीं फिरोजाबाद मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ संगीता अनेजा ने कहा कि “यह एक जटिल मामला था। लीवर बड़ा हो गया था और पेट में तरल पदार्थ था।

जैसे-जैसे उसकी हालत बिगड़ती गई, हमने उसे वेंटिलेटर पर भी रखा। हमने वह सब कुछ किया, जो हम कर सकते थे, लेकिन हम उसे बचा नहीं सके” ।

इस पूरी घटना पर एक पत्रकार आलोक पांडे ने ट्वीटर पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “यह देखना असहनीय हो सकता, लेकिन इन कहानियों को बताना जरूरी है।

एक वरिष्ठ की कार के सामने एक हताश महिला बैठ जाती है, जो डेंगू प्रभावित फिरोजाबाद का निरीक्षण कर रहे अधिकारी से सरकारी अस्पताल में लापरवाही बरतने का आरोप लगाती है। इसके कुछ देर बाद ही उसकी उसकी 11 साल की बहन की मौत हो गई”।

विनोद कापड़ी ने आलोक पांडे के इस ट्वीट को रीट्वीट करते हुए कहा, “आदित्यनाथ के कार्यकाल की असलियत सड़क पर गिरी और बिलख रही। ये एक बहन है और यही सब छिपाने के लिए वो #AbbaJaan का नैरेटिव बनाने में लगे हैं”।

बता दे कि सिर्फ यूपी में ही डेंगू औऱ बुखार से मरने वालों की संख्या 100 के ऊपर पहुंच चुकी है और अकेले फिरोजाबाद में ही 60 से अधिक लोगों की मौत हुई है। इसके सबसे ज्यादा शिकार बच्चे हो रहे है।

हालांकि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सरकार के पास अभी भी पूरा आंकड़ा नहीं है, लेकिन मौजूद इन आंकड़ो को देखकर भी सरकार अब तक चुप बैठी है।

सवाल यह है कि आखिर डेंगू औऱ बुखार से होने वाली इन मौतों का सिलसिला कब थमेगा और अब तक सरकार ने इस पर कोई कड़ा कदम क्यों नहीं उठाएगी।

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