“हम उत्तर प्रदेश सरकार से तंग आ चुके हैं, ऐसा लगता है उत्तर प्रदेश में ‘जंगलराज’ है।” गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने ये टिपण्णी योगी सरकार के लिए की है।

सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि, “आखिर ऐसा क्यों होता है कि अधिकतर मामलों ने यूपी सरकार की ओर से पेश वकीलों के पास संबंधित अथॉरिटी का कोई उचित निर्देश नहीं होता।” कोर्ट ने ये टिपण्णी बुलंदशहर के सैकड़ों वर्ष पुराने एक मंदिर से जुड़े प्रबंधन के मामले की सुनवाई करने के दौरान की।

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सुप्रीम कोर्ट की इस टिपण्णी पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं प्रवक्ता राजीव राय ने ट्विटर पर लिखा- सुप्रीम कोर्ट की तो बात ही छोड़ दीजिए, सुप्रीम कोर्ट के साथ उत्तर प्रदेश की जनता भी उत्तर प्रदेश की सरकार द्वारा फैलाए जा रहे जंगलराज से परेशान हैं। पर बाबा जी तो हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनाव प्रचार में हैं।

दरअसल न्यायमूर्ति एनवी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने यूपी सरकार की ओर से पेश एडिशनल एडवोकेट जनरल से पूछा कि यूपी में कोई ट्रस्ट या सहायतार्थ ट्रस्ट एक्ट है? क्या वहां मंदिर और सहायतार्थ चंदे को लेकर कोई कानून है? इसपर यूपी सरकार के वकील ने कहा कि, इस बात की उन्हें कोई जानकारी नहीं है।

इसी बात से नाराज होकर पीठ ने कहा कि, “ऐसा लगता कि राज्य सरकार चाहती ही नहीं कि वहां कानून हो। पीठ ने कहा, लगता है वहां जंगलराज है। हम यूपी सरकार से परेशान हो गए हैं। हर दिन ऐसा देखने को मिलता है कि सरकार की ओर से पेश वकीलों के पास उचित निर्देश नहीं होते हैं। फिर चाहें वह दीवानी मामला हो या अपराधिक। पीठ ने पूछा की आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? नाराज पीठ ने अब इस मामले में यूपी के मुख्य सचिव को तलब किया है।

वैसे सुप्रीम कोर्ट की इस टिपण्णी के बाद ये साफ़ हो गया है कि, मीडिया ने पूर्ववर्ती सरकारों और वर्तमान की योगी सरकार के साथ भेदभाव कर रही हैं। क्योंकि अखिलेश-मायावती की सरकारों ने गोली चलने की भी मीडिया ‘जंगलराज’ बताकर पेश करता था। लेकिन अब मीडिया ने योगी सरकार में घुप्प चुप्पी साध रखी है।

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