पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में जलप्रलय अपने चरम पर है. पूरी काशी डूब चुकी है. बाढ़ की वजह से आम जनजीवन तो अस्त व्यस्त हो ही चुका है, कई इलाकों में यातायात व्यवस्था भी ठप पड़ चुकी है.

ऐसे में सीएम योगी आदित्यनाथ वाराणसी पहुंचे और उन्होंने स्टीमर के जरिए बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया.

एक राज्य के सीएम का बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करना कोई नई बात नहीं है लेकिन जिस तरह से स्टीमर पर सीएम योगी के लिए सोफे की व्यवस्था की गई, उसे लेकर उनकी आलोचना शुरु हो गई है.

पूर्व पत्रकार व समाजवादी पार्टी के सोशल मीडिया डिपार्टमेंट के प्रमुख आशीष यादव आशीष यादव ने सीएम योगी के सोफे युक्त स्टीमर दौर पर तंज कसते हुए कहा है कि

‘अपने कुशासन से जनता की नाव को डुबो कर रख देने वाल सीएम को बाढ़ दौरे के दौरान भी स्टीमर पर बैठने के लिए भी सोफे का सिंहासन चाहिए.’

सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर तरह तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. नरेश अग्रवाल नामक एक यूजर ने लिखा है कि एक तरफ ममता बनर्जी पैदल ही बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर रही हैं तो दूसरी तरफ बाबा के नाव में भी सिंहासन लगा दिया गया है.

अब समय आ गया है कि इन्हें सिंहासन का मोह त्याग कर बचे हुए समय में ही जनता की भलाई के लिए कुछ काम कर लेने चाहिए अन्यथा इनके पास मठ का ही सिंहासन बचा रहेगा.

बताते चलें कि बाढ़ की वजह से पीएम नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी बेहाल स्थिति में पहुंच चुका है. खबरों के अनुसार गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ता चला जा रहा है.

बुधवार तक गंगा का जलस्तर 72.04 मीटर तक पहुंच चुका था जो 71.26 मीटर के खतरे के निशान से 78 सेमी ज्यादा है.

वाराणसी में बाढ़ की वजह से स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि शहरी इलाकों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक 30 हजार से ज्यादा लोग इससे प्रभावित हो चुके हैं.

गंगा और वरुणा नदी की बाढ़ से 41 गांव और 17 मोहल्ले जलमग्न हो चुके हैं. शहर से लेकर गांव तक 21 बाढ़ चौकियों का निर्माण करना पड़ा है जिसमें लगभग 3000 हजार लोगों ने शरण ली है.

गंगा में उफान की वजह से वरुणा, असि, गोमती, नाद और कैथी नदियों में भी बाढ़ आ चुकी है.

वाराणसी शहर के सामने घाट से लेकर दशाश्वमेध घाट तक पानी बाहर आ चुका है. दशाश्वमेध घाट से बाढ़ का पानी गोदौलिया तक बढ़ता ही चला आ रहा है.

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