उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने योगी सरकार की तरफ से बनाई गई एसआईटी के कामकाज पर असंतोष जाहिर करते हुए फटकार लगाई है।

इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के 3 जजों की बेंच ने सुनवाई करते हुए योगी सरकार की नई स्टेटस रिपोर्ट पर असंतोष जाहिर करते हुए कहा है कि हमने सरकार को 10 दिन का समय दिया था। लेकिन स्टेटस रिपोर्ट से साफ जाहिर हो रहा है कि इस मामले की जांच में कोई प्रगति नहीं हुई है।

कोर्ट का कहना है कि जिस तरह से इस मामले की जांच की जा रही है, उससे आरोपी बच सकते हैं।

इसी बीच इस मामले में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। दरअसल लखीमपुर हिंसा मामले में यह तथ्य सामने आए हैं कि स्थानीय पत्रकार रमन कश्यप की मौत जीप से कुचले जाने के कारण हुई है।

इसके अलावा कृषि कानून का विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों पर जिस बंदूक से गोली चलाई गई थी। वह भी लाइसेंसी थी। इस बंदूक का लाइसेंस भाजपा नेता अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा के नाम पर है।

जानकारी के लिए आपको बता दें कि इस मामले में फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट में किसानों पर फायरिंग की पुष्टि हुई है।

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि यह फायरिंग केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा और उसके करीबी अंकित दास की लाइसेंसी बंदूक से की गई। जबकि अब तक भाजपा नेता द्वारा फायरिंग किए जाने की बात को भी नकारा जा रहा था।

फॉरेंसिक लैब की इस रिपोर्ट में किए गए दावे के बाद केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

गौरतलब है कि 3 अक्टूबर को लखीमपुर खीरी में किसानों के ग्रुप द्वारा उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का विरोध किया गया था।

इस दौरान केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा ने किसानों के काफिले पर जीत चढ़ा दी और फायरिंग की जिसमें 4 किसानों और एक पत्रकार की मौके पर ही मौत हो गई थी।

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