यूपी देश का सबसे बड़ा सूबा है. सभी पार्टियां हर हाल में यहां पर अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाए हुए हैं. यूपी में मुख्य मुकाबला समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच माना जा रहा है.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यूपी में इस बार बदलाव की लहर है. पिछले विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की हार की सबसे बड़ी वजह चाचा शिवपाल और भतीजे अखिलेश के बीच खटपट को बताया जाता है.

पर इस बार ऐसी तस्वीरें सामने निकल कर आ रही हैं, जिसने यूपी की राजनीति में दिलचस्प रंग घोल दिया है.

गुरुवार को समाजवादी पार्टी के संरक्षक और पूर्व सीएम मुलायम सिंह यादव इटावा में विजय यात्रा पर थे. इस यात्रा में मुलायम सिंह यादव एक सुसज्जित रथ पर सवार थे.

इस दौरान रथ पर अखिलेश यादव और शिवपाल सिंह यादव एक साथ सवार थे.

इन तस्वीरों ने हर किसी को निःशब्द कर दिया. संभवतः यह पहला मौका था जब अखिलेश यादव को चुनाव जिताने के लिए मुलायम सिंह यादव ने रोड शो किया.

इस दौरान चाचा शिवपाल और भतीजे अखिलेश की एक साथ की तस्वीरों ने खासी सुर्खियां बंटोरी.

शिवपाल सिंह यादव ने फेसबुक पोस्ट लिखते हुए कहा है कि “कल की इटावा में इस समाजवादी एकता के प्रतीक तस्वीरें आने के बाद से भाजपा की बौखलाहट बढ़ गई है. व्यक्तिगत हमला, चरित्र हनन, अशांति पैदा करना और नकारात्मकता फैलाना… यही भाजपा का हथियार है.

भाजपा के शब्दकोष में तरक्की और विकास जैसे शब्द नहीं है. थोड़ा और इंतजार करिए. 10 मार्च भाजपा साफ.

 

यूपी की राजनीति के जानकारों का कहना है कि वर्ष 2016 के बाद संभवतः यह पहला मौका है जब मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव और शिवपाल सिंह यादव को एक साथ चुनावी मंच पर देखा गया है.

राजनीतिक विश्लेषक कह रहे हैं कि यादव लैंड में एक साथ इन तीनों नेताओं का जनता के बीच जाना सियासी समीकरणों में बड़ा उलटफेर करता हुआ दिखाई दे रहा है.

मुलायम, अखिलेश और शिवपाल की एक साथ की तस्वीरों ने भाजपा खेमे के अंदर खलबली मचा कर रख दी है.

अखिलेश यादव ने भी इन तस्वीरों को साझा करते हुए कहा है कि बड़ों का आर्शीवाद और जनता का साथ. अबकी बार लेकर आएगा ऐतिहासिक बदलाव…

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