भाजपा शासित उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के कार्यकाल में राज्य के विकास के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं।

आने वाले विधानसभा चुनाव के प्रचार प्रसार के चलते उत्तर प्रदेश में जगह-जगह राज्य को नंबर वन बताते हुए बड़े-बड़े होर्डिंग से लगवाए गए हैं।

लेकिन असलियत यह है कि योगी सरकार राज्य की जनता को बेसिक स्वास्थ्य सुविधाएं तक मुहैया करवाने में भी समर्थ नहीं है।

उत्तर प्रदेश से कई बार ऐसी खबरें आ चुकी हैं कि बेसिक स्वास्थ्य सुविधाएं ना होने के चलते अस्पताल जाने से पहले ही लोगों की जान चली जाती है।

ऐसा ही एक मामला फिरोजाबाद के टापाकला में देखने को मिला है। जहां बुखार से जूझ रहे बच्चे को परिजन सौ शैय्या अस्पताल लेकर गए थे।

लेकिन पहले तो किसी भी डॉक्टर ने बच्चे को चेक नहीं किया। जब बच्चे का इलाज के लिए नंबर आया। तो डॉक्टर ने जांच के बाद बच्चे को मृत घोषित कर दिया।

बताया जाता है कि बच्चे की मौत की खबर सुनते ही उसकी मां बेहोश हो गई। परिजनों का आरोप है कि जब बच्चे को अस्पताल ले जाया गया था। तो डॉक्टरों ने उसे देखा ही नहीं और बाद में उसे मृत घोषित कर दिया गया।

अगर समय रहते बच्चे की जांच कर लेते तो शायद आज वह जिंदा होता। परिजनों द्वारा डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया गया है।

दरअसल उत्तर प्रदेश के कई जिलों में इस वक्त डेंगू और वायरल बुखार का प्रकोप चल रहा है। इसके कारण कई मेडिकल कॉलेजों में मरीजों की संख्या बढ़ गई है।

ऐसे में एक बार फिर राज्य की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था की सच्चाई सामने आ गई है।

इस मामले में कॉमेडियन राजीव निगम ने सीएम योगी आदित्यनाथ पर तंज कसा है। उन्होंने ट्वीट कर लिखा है कि प्रदेश में बच्चों का बुरा हाल है और CM साहब अब्बा अब्बा चिल्ला कर आनंद ले रहे है..

गौरतलब है कि इससे पहले कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान भी उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य प्रशासन की सच्चाई सामने आने से योगी सरकार पर सवाल उठे थे।

जब ज्यादतार सरकारी अस्पतालों के पास लोगों को इलाज के लिए अस्पताल लाने के लिए एंबुलेंस नहीं थी। कोरोना मरीजों के लिए वैक्सीन और ऑक्सीजन मौजूद नहीं थी।

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