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उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से बड़ा मामला सामने आया है। जिले के शुकतीर्थ स्थित गोड़िया मठ से आठ बच्चों को मुक्त कराया गया है। इन बच्चों को पढ़ाई के नाम पर मिज़ोरम और त्रिपुरा से लाया गया था। लेकिन यहां इन्हें बंधक बनाकर इनका शोषण किया जा रहा था।

बच्चों को मठ से मुक्त एक छापेमारी के बाद कराया गया। ये छापेमारी मंगलवार को चाइल्ड केयर हेल्पलाइन की टीम ने पुलिस के सहयोग से की। हेल्पलाइन को मठ में दस बच्चों को बंधक बनाए जाने की सूचना मिली थी, लेकिन जब छापेमारी की गई तो वहां आठ बच्चे ही मिले। फिलहाल दो और बच्चों की तलाश की जा रही है

हेल्पलाइन प्रभारी पूनम शर्मा ने मीडिया को मामले की जानकारी देते हुए कहा कि उन्हें आश्रम में दस बच्चों को बंधक बनाकर जबरन काम कराए जाने व उन्हें टॉर्चर किए जाने की शिकायत मिली थी। इसी शिकायत के आधार पर उन्होंने पुलिस के सहयोग के साथ मठ में मंगलवार शाम को छापेमारी की। जहां उन्हें मौके पर सिर्फ़ आठ बच्चे ही मिले।

उन्होंने बताया कि दो बच्चे अभी नहीं मिले हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। शर्मा ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर दोनों बच्चे नहीं मिलते हैं तो इस संबंध में आला अफसरों को सूचित कर आश्रम संचालकों के खिलाफ सख़्त कार्रवाई कराई जाएगी।

पूनम के मुताबिक़, बरामद किए गए सभी बच्चे मिजोरम व त्रिपुरा के हैं, जिन्हें पढ़ाई कराने के लिए आश्रम में लाया गया था। बरामद बच्चों ने आश्रम में बंधक बनाकर रखने और टॉर्चर किए जाने की जानकारी देते हुए अपने घर जाने की बात कही है।

हालांकि मठ ने बच्चों को बंधक बनाए जाने की बात से इनकार किया है। मठ से जुड़े भक्ति भूषण गोविंद ने बच्चों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बच्चों को उनके परिजनों की सहमति से आश्रम में लाया गया था। बच्चों से आश्रम में किसी तरह का काम नहीं कराया जाता था, उनसे सिर्फ उनकी इच्छा के मताबिक गोसेवा कराई जाती थी।

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