उत्तर प्रदेश के चुनावी माहौल के बीच एक बार फिर गौ-तस्करी और धर्म के नाम पर राजनीती तेज़ हो गई है।

गाजियाबाद में 11 नवंबर को एसएचओ राजेंद्र त्यागी की सात गोतस्करों से मुठभेड़ हुई। हैरानी की बात है कि सातों आरोपियों को पैर में एक ही जगह पर गोली लगी है।

मुठभेड़ के अगले दिन ही गाजियाबाद के लोनी पुलिस स्टेशन में हिन्दूवादी संगठनों द्वारा एसएचओ को सम्मानित किया गया।

गौतस्करी के नाम पर आरोपियों को गोली मारना बड़ी खबर है, लेकिन उससे भी बड़ी खबर है कि पुलिस के इस एक्शन के बाद हिंदूवादी संगठनों ने थाने में नारेबाजी की।

बात केवल इतनी सी ही नहीं है। थाने में एसएचओ राजेंद्र त्यागी के लिए हुए कार्यक्रम के बाद एसएसपी पवन कुमार ने त्यागी को चार्ज से हटाकर उनका ट्रांसफर कर दिया।

त्यागी की जनरल डायरी की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल की जा रही है। उसमें त्यागी ने लिखा है कि वो ट्रांसफर से आहत है और इससे उसका मनोबल टूटा है।

मामले ने राजनीतिक तूल तब पकड़ी जब लोनी के भाजपा विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने गाजियाबाद एसएसपी को पत्र लिखकर उनके द्वारा लिए गए एक्शन का विरोध किया।

ध्यान देने वाली बात है कि थाने में एसएचओ के लिए हुए कार्यक्रम में विधायक भी मौजूद थे।

पत्र में विधायक ने लिखा है कि एनकाउंटर करने वाले एसएचओ का तबादला करके अधिकारियों ने उन्हें अपमानित किया है।

इससे गौतस्करों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे पुलिसकर्मियों का मनोबल गिरा है। पत्र में एसएचओ के तबादले को निरस्त करने की मांग की गई है।

जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर नरसिंहानंद गिरि ने इस मामले पर मुख्यमंत्री को ट्वीट करके कहा, “लोनी बार्डर थाना प्रभारी SHO राजेन्द्र त्यागी का तबादला करके मुसलमान माफिया सलीम पहलवान व सभी गौतस्कर आतंकियों को खुली झूठ देने वाले उच्च अधिकारियों पर संज्ञान लें योगी आदित्यनाथ।”

इस पूरे मामले को बढ़ा-चढ़ाकर धार्मिक एंगल दिया जा रहा है जबकि सातों आरोपियों के एक ही जगह पर गोली लगने की वजह से पुलिस की भूमिका संदिग्ध देखी जा रही है।

वहीं दूसरी तरफ, तमाम मीडिया रिपोर्ट्स बताती है कि सरकार की गौशालाओं में ही गाय दम तोड़ रही हैं।

इस वर्ष के अगस्त महीने में उन्नाव की एक गौशाला का वीडियो वायरल हुआ जिसमें बीमार गाय और कई गायों के शव पड़े हुए दिख रहे थे।

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