“जनता का आक्रोश जो न कराए” यूपी में विधानसभा चुनाव अपने चरम पर है. जनता सरकार से लेकर विधायकों तक का हिसाब किताब अपने तरीके से कर रही है.

कई जगहों पर प्रत्याशियों को खदेड़ा भी जा रहा है तो कई उम्मीदवार ऐसे भी हैं जिन्हें लोग गांव में वोट मांगने के लिए घुसने भी नहीं दे रहे हैं.

पिछले दिनों भाजपा के एक विधायक का वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वो यह कहती हुई दिखाई दे रही थीं कि हमारी हालत इतनी खराब हो चुकी है कि लोग अब नमस्कार का जवाब तक नहीं दे रहे हैं

तो वहीं एक दूसरे विधायक दूसरी पार्टी को वोट देने से इतने बौखलाए हुए नजर आएं कि जनता को ही गाली देने लगें.

जाहिर तौर पर जो सरकार में होता है, उसे ही जनता के आक्रोश का सामना करना पड़ता है.

ऐसा ही एक और नजारा यूपी की रॉबर्ट्सगंज से भारतीय जनता पार्टी के विधायक और वर्तमान प्रत्याशी पांच साल में कोई काम नहीं कर पाने के लिए कान पकड़ कर उठक बैठक की और जनता से माफी मांगी.

बताया जा रहा है कि विधायक भूपेश चौबे ने त्रिदेव कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान पांच वर्ष के दौरान अपनी हुई गलती को स्वीकार किया और सबके सामने ही कान पकड़ कर उठक बैठक की.

भूपेश चौबे ने इस त्रिदेव कार्यकर्ता सम्मेलन में जब कान पकड़ कर उठन बैठक शुरु की तो नजारा देखने लायक था.

वहां मौजूद जहां कई लोग विधायक की इस उटपटांग हरकत देखकर हंस रहे थें तो वहीं विधायक के समर्थक भूपेश चौबे जिंदाबाद के नारे लगा रहे थें.

इस दौरान भूपेश चौबे ने कहा कि जिस तरह से से वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में आप सभी देवतुल्य कार्यकर्ताओं ने आर्शीवाद देकर विजयी बनाया, ठीक उसी तरह से इस बार भी आप सभी के आर्शीवाद की जरुरत है.

जिस तरह की हरकत इस प्रत्याशी ने खुले मंच से की, उससे साफ पता चलता है कि पार्टियों की लहर के चक्कर में इस तरह के गैर राजनीतिक लोग विधायक, सांसद बन जाते हैं और पांच साल तक लोगों को भुगतना पड़ जाता है.

प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री जीताने के चक्कर में अपने क्षेत्र से गलत लोगों को जीताकर भेजना भी लोकतंत्र के साथ एक प्रकार का धोखा ही होता है.

अगर ये विधायक पांच साल तक जनता के बीच काम किए होते तो इस तरह से उठक बैठक कर और कान पकड़ कर माफी नहीं मांगनी पड़ती.

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