हाथरस मामले में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को बड़ा झटका लगा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने मामले में सरकार के रवैये को लेकर नाराज़गी ज़ाहिर की है।

कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाते हुए पूछा है कि आखिर ज़िलाधिकारी को अबतक क्यों नहीं हटाया गया।

कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 25 नवंबर की तारीख तय की है। इससे पहले हाथरस मामले की सुनवाई में सरकार ने भी अपना पक्ष रखा। हालांकि सुनवाई में सरकार की ओर से जो वकील पेश हुए वो पिछली सुनवाई में नहीं थे।

पीड़ित पक्ष की वकील सीमा कुशवाहा ने कहा कि जो वकील सरकार की ओर से सुनवाई में पेश हुए उन्हें मामले की पूरी जानकारी नहीं थी। उन्होंने कोर्ट से मामले के बारे में जानने के लिए और समय मांगा।

सीमा कुशवाहा ने कहा कि मामले में पहले ही बहुत देर हो चुकी है, ऐसे में और देरी करना न्यायसंगत नहीं होगा। उन्होंने सवाल खड़े करते हुए पीड़ित परिवार को अभी तक सांत्वना के सिवा कुछ नहीं मिला है।

सीमा ने बताया कि हमने परिवार की सुरक्षा की मांग की है और अधिकारियों के टर्मिनेशन के लिए अर्ज़ी भी दाखिल करेंगे। साथ ही पीड़ित परिवार को दिल्ली में आवास दिए जाने की मांग भी की है।

उन्होंने कहा कि आरोपित जिस समुदाय से आते हैं, वह उस गांव में बहुत ज़्यादा हैं, ऐसे में पीड़ित परिवार को जान का खतरा है। सीमा कुशवाहा ने बताया कि कोर्ट ने डीएम पर कार्यवाई पर सवाल किया तो सरकार ने कहा की हम ट्रांसफर कर देंगे। पीड़ित पक्ष के वकील ने अधिकारियों पर कड़ी कार्यवाई की मांग की।

क्या है मामला?

उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के चंदपा थाना क्षेत्र के एक गांव में बीते 14 सितंबर को एक युवती के साथ कथित रूप से सामूहिक दुष्कर्म किया गया था। इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया। चारों आरोपी फिलहाल अलीगढ़ जिला कारागार में हैं।

पहले अलीगढ़ जिला अस्पताल में भर्ती होने के बाद युवती को जेएन मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। हालत बिगड़ने पर उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल भेजा गया, जहां 29 सितंबर को उसने दम तोड़ दिया। इसके बाद प्रशासन ने जल्दबाजी में आधी रात को ही उसका अंतिम संस्कार कर दिया।

जिसके बाद परिवार और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। जिसके मद्देनज़र स्थानीय प्रशासन पर सवाल के कुछ लोगों को निलंबित भी किया गया था। इसके बाद भी जब मामला शांत नहीं हुआ तो योगी सरकार ने पूरे केस की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया।

हालांकि एसआईटी को जो समय दिया गया था उस समय में एसआईटी अपनी जांच पूरी करने में नाकाम रही। फिलहाल एसआईटी ने अपनी जांच पूरी की और शासन को रिपोर्ट सौंपी है।

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