अखिलेश यादव के कार्यकाल (2012-17) को बीजेपी यादवों की सरकार कहती रही है। यानि बीजेपी के मुताबिक अखिलेश के कार्यकाल में सरकारी महकमों में यादवों की नियुक्ति की गई थी! BJP के इस आरोप में कितनी सच्चाई है? शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपनी झांसी की रैली में बीजेपी के इन सभी प्रोपेगेंडा आरोपों का मुँहतोड़ जवाब दिया।

सपा अध्यक्ष अखिलेश ने अपने भाषण में कहा कि, “हमपर BJP ने आरोप लगाया कि हमारी सरकार ने भेदभाव किया था। बीजेपी ने कहा था कि ये यादवों की सरकार है। लेकिन योगी सरकार में इस समय एक भी डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर (DM) और एसपी यादव नहीं हैं।”

ये हैरान करने वाली बात है कि यूपी में इतनी बड़ी आबादी वाली ओबीसी जातियों में से एक (यादव जाति) के एक भी यादव डीएम और एसपी नहीं हैं!

अगर अखिलेश सरकार में इतने सारे यादव डीएम और एसपी थे तो अब योगी सरकार में ये कहाँ गए? क्या BJP की योगी सरकार ने जातिगत भेदभाव करते हुए उन्हें हटा दिया? अगर इस जाति के अधिकारी नहीं है तो अब यूपी में योगी सरकार में किस जाति के डीएम और एसपी मौजूद हैं?

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अखिलेश ने आगे कहा कि, बीजेपी ने हमें और आपको बदनाम किया कि हम जातिवाद करते हैं। इसीलिए हम आपको झांसी में जगाने आए हैं। उन्होंने पीएम नरेन्द्र मोदी पर तीखा हमला करते हुए कहा कि अब लोगों का चाय का नशा उतर गया है इस बार लोग समाजवादी पार्टी को वोट देंगे।

वहीं अखिलेश ने कहा कि, आबादी में प्रजापति समाज ज्यादा है। लेकिन इस सरकार ने उनको आबादी के हिसाब से हक़ और सम्मान नहीं दिया। उन्होंने कहा, समाजवादी सरकार आने पर हम आबादी के हिसाब से जातियों को हक़ और सम्मान देंगे। बीजेपी से बड़ी जातिवादी पार्टी इस देश में कोई नहीं है। जिसने जाति और धर्म में बांटा। जैसे अंग्रेज करते थे वैसे ही बीजेपी बांटो और राज करो करती है।

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गौरतलब है कि अखिलेश सरकार में बीजेपी ने प्रोपेगेंडा फैलाकर आरोप लगाया था कि उन्होंने 86 एसडीएम में से 56 यादवों की भर्ती की है। लेकिन बाद में बीजेपी का ये आरोप झूठा साबित हुए था।