देश की राजधानी दिल्ली को घेरे हुए लाखों किसानों की भीड़ बार-बार इस बात को दोहरा रही है कि इस गणतंत्र दिवस को दुनिया राजपथ का परेड नहीं देखेगी बल्कि किसानों द्वारा निकाले जा रहे ट्रैक्टर मार्च को देखेगी।

इससे घबराई मोदी सरकार तरह तरह के समझौते और प्रलोभन पर उतारू है मगर किसान अपने इरादे से टस से मस नहीं हो रहे हैं।

अब किसानों के इस ट्रैक्टर मार्च के संकल्प को समर्थन मिला है उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का, जिन्होंने ऐलान किया है कि 26 जनवरी को पूरे उत्तर प्रदेश के सभी जनपदों में तहसील स्तर पर तिरंगा फहराते हुए ट्रैक्टर मार्च निकालना है।

अपनी प्रेस रिलीज में समाजवादी पार्टी ने दावा किया है कि पूरा आंदोलन अहिंसात्मक होगा मगर सरकार के खिलाफ इस तरह के विरोध प्रदर्शन की जरूरत इसलिए भी है क्योंकि अन्नदाता किसानों का अपमान किया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश की इस प्रमुख विपक्षी पार्टी ने मांग की है कि तीनों नए कृषि बिलों को वापस लिया जाए, इससे कम में किसी भी तरह के समझौते की गुंजाइश नहीं है।

अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी किसानों की पार्टी है इसलिए किसानों के साथ गणतंत्र दिवस मनाएगी, भारतीय जनता पार्टी पूंजीपतियों के साथ है इसलिए उसे सबक सिखाया जाएगा।

इसके साथ ही अखिलेश यादव ने कहा कि किसानों ने ही देश को आत्मनिर्भर बनाया है, उनके इसी त्याग और संघर्ष की वजह से हम समाजवादी उनके साथ खड़े हैं। पहले भी हमने किसान यात्रा और समाजवादी घेरा कार्यक्रम चलाया है आगे भी हर मोड़ पर किसानों का साथ देते रहेंगे।

दरअसल अखिलेश यादव का ये आक्रामक तेवर और समाजवादी पार्टी का पूरी तरह से किसान आंदोलन में शामिल हो जाना सत्ताधारी पार्टी के लिए इसलिए चिंता का विषय बन सकती है क्योंकि अभी तक कहा जा रहा है कि किसान आंदोलन क्षेत्र विशेष में सीमित है,

ऐसे में अगर समाजवादी कार्यकर्ता इस आंदोलन को उत्तर प्रदेश के गांव गली तक ले जाने में सफल होंगे तो भारतीय जनता पार्टी की सरकार की नींद उड़ सकती है क्योंकि कृषक समाज के खिलाफ होते ही भारतीय जनता पार्टी सरकार बनाने की हैसियत खो देगी।

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