योगगुरु बाबा रामदेव का एक और झूठ पकड़ा गया है। उन्होंने दावा किया था कि उनकी कंपनी पंतजलि द्वारा बनाई गई कोरोना की दवा कोरोनिल को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से 150 देशों में बेचने को मंजूरी मिल गई है।

अब खुद WHO ने एक ट्वीट कर इस बात की पुष्टी की है कि उसने ऐसी कोई अनुमति नहीं दी है।

WHO ने ट्वीट कर कहा कि उसने कोविट-19 के ट्रीटमेंट के लिए किसी भी ट्रेडिशनल मेडिसिन के असर का ना कोई रिव्यू किया है ना ही किसी को सर्टिफिकेट दिया है।

WHO ने इस बात की पुष्टी तब की है जब पतंजली की ओर से ये दावे किए जा रहे थे कि उसकी दवा कोरोनिल को कोरोना के इलाज के लिए 150 देशों में बेचने की अनुमति मिल गई है।

पतंजली की ओर से दावा किया गया था कि कोरोनिल को WHO की सर्टिफिकेशन स्कीम के तहत आयुष मंत्रालय से सर्टिफिकेट मिला हुआ है।

बता दें कि शुक्रवार को ही पतंजली की ओर से कोरोना की दवा कोरोनिल लॉन्च की गई है। इस दवा को बाबा रामदेव ने केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री हर्षवर्धन और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की मौजूदगी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर लॉन्च किया था।

रामदेव ने दावा किया कि पतंजलि रिसर्च इंस्टिट्यूट की यह दवा WHO से सर्टिफाइड है। इसे WHO ने GMP यानी ‘गुड मैनुफैक्‍चरिंग प्रैक्टिस’ का सर्टिफिके‍ट दिया है।

इसके साथ ही उन्होंने समाचार चैनल न्यूज नेशन को दिए इंटरव्यू में भी अपने दावे को दोहराया था। रामदेव ने कहा कि कोरोनिल को DCGI ने मंजूरी दे दी है। साथ ही WHO से कोरोनिल को 150 देशों में बेचने को मंजूरी मिली है।

इंटरव्यू में उन्होंने आगे कहा कि भारत विरोधी ताकतें नहीं चाहती हैं कि आयुर्वेद की कोरोना दवा भारत में बने।

इसीलिए पहले भी विरोध किया गया। अब सभी कह रहे हैं कि यह काम पहले होना चाहिए थे। पतंजलि मानवता की भलाई के लिए काम करती रहेगी।

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