बकरीद के मौके पर राजस्थान के झुंझुनू जिले के गांव कोलेंडा का रहने वाला 22 वर्षीय जवान मोहसिन खान जम्मू-कश्मीर के नौशेरा सेक्टर में पेट्रोलिंग के दौरान सरहद पार से हुई गोलाबारी में शहीद हो गए थे।

बताया जाता है कि भारतीय जवान मोहसिन खान की इस गोलाबारी में छाती में गोली लगने से मौत हो गई। शहीद मोहसिन खान के पार्थिव शव को उनके गांव कोलिंडा जब पहुंचाया गया तो बेटे को तिरंगे में लिपटा देखकर परिवार समेत पूरे गांव की आंखें नम हो गई।

शहीद मोहसिन खान के पार्थिव शव के साथ आए सेना के अधिकारी ने सरवर खान को तिरंगा सौंपते हुए शहादत को सलाम किया। जवानों ने गार्ड आफ ऑनर दिया।

बताया जाता है कि कोलिंडा गांव के वासी मोहसिन खान ने 19 वर्ष की उम्र में भारतीय सेना ज्वाइन की थी और 22 साल की उम्र में मोहसिन खान अपने देश के लिए शहीद हो गए। 31 जुलाई को शहीद हुए मोहसिन खान के शोक में पूरे गांव में इस बार ईद नहीं मनाई। 22 वर्षीय मोहसिन खान को ईद के दिन 1 अगस्त 2020 को अंतिम विदाई दी गई।

शहीद मोहसिन की अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। वहीं महिलाओं ने अपने शहीद की अंतिम यात्रा में छतों से फूल बरसाकर नम आंखों से श्रद्धांजलि अर्पित की। शहीद मोहसिन खान के परिजनों ने बताया है कि हाल ही में उनकी सगाई तय की गई थी।

एक महीने के अवकाश के बाद मोहसिन महीने भर पहले ही ड्यूटी पर वापस लौटे थे। मोहसिन के परिवार के कई सदस्य भारतीय सेना में हैं। उनके पिता सरवर खान सेना में सूबेदार सेवानिवृत हुए हैं। भाई अमजद अली 14 ग्रेनेडियर में है, जिन्हे अभी ज्वाइनिंग मिलनी है। इनके अलावा चाचा और ताऊ भी सेना में अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

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