जिस तब्लीगी जमात के लोगों को लेकर मार्च में टीवी मीडिया ने देश में कोहराम मचा दिया था। जिस मीडिया ने तब्लीगी जमात के लोगों को भारत में कोरोना विस्फोट का कारण तक बता दिया था।

अब महाराष्ट्र के ठाणे की मजिस्ट्रेट अदालत में दो अलग-अलग मामलों में 21 विदेशी नागरिकों समेत तब्लीगी जमात के 28 सदस्यों को रिहा करने का आदेश दिया है।

अदालत की तरफ से तब्लीगी जमात के लोगों की ये रिहाई उस मीडिया के मुंह पर तमाचा है जो जिसने दिन-रात मुसलमानों के प्रति नफरत फैलाकर उन्हें भारत में कोरोना फैलाने का कारण बता दिया था।

इन लोगों के खिलाफ मार्च में राजधानी दिल्ली में हुए तब्लीगी जमात के कार्यक्रम के बाद मामले दर्ज किए गए थे। विदेशी नागरिकों पर वीजा नियमों के उल्लंघन के साथ-साथ कोरोना वायरस प्रकोप के बाद जारी किए गए दिशा-निर्देशों के उल्लंघन का आरोप था।

पिछले हफ्ते बम्बई उच्च न्यायालय को औरंगाबाद पीठ ने दिल्ली के कार्यक्रम के बाद महाराष्ट्र आने वाले 29 विदेशी नागरिकों के खिलाफ दर्ज ऐसी ही एफआईआर को निरस्त कर दिया था।

मजिस्ट्रेट आर एच झा ने मंगलवार को उच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि, तब्लीगी जमात के 28सदस्य आने खिलाफ दर्ज मामलों से मुक्त होने के हकदार हैं।

बात दें कि उच्च न्यायालय पहले ही तब्लीगी जमात पर मीडिया की रिपोर्टिंग पर टिप्पणी कर चुका है। जिसमें न्यायालय ने मीडिया को आड़े हाथों लिया था। तो फिर सवाल है कि क्या मुसलमानों की देश मे छवि खराब करने के लिए मीडिया माफी मांगेगा?

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