बिहार में नई सरकार को बने अभी 1 हफ्ते भी नहीं हुए हैं मगर नीतीश कुमार की मुश्किलें बढ़ने लगी हैं। भ्रष्टाचार के आरोप में चौतरफा घिरे शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना पड़ गया।

शिक्षा मंत्री का पद संभालते ही आज पहले ही दिन मेवालाल चौधरी को इस्तीफा देना पड़ा।

दरअसल मेवालाल चौधरी पर पहले से भ्रष्टाचार के आरोप थे और उन्होंने इसके बावजूद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ उनके मंत्रिमंडल में शामिल होने के लिए शपथ लिया।

उनके शपथ लेते ही तेजस्वी यादव के नेतृत्व में विपक्ष हमलावर हो गया और घड़ी दर घड़ी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से सवाल पूछना शुरु कर दिया।

विपक्ष की सक्रियता देख बैकफुट पर आए नीतीश कुमार ने संभवतः दबाव बनाकर इस्तीफा मांगा होगा।

मेवालाल चौधरी के इस्तीफे की खबर आने के बाद तेजस्वी यादव ने प्रतिक्रिया देते हुए ट्विटर पर लिखा-

“मा. मुख्यमंत्री जी,

जनादेश के माध्यम से बिहार ने हमें एक आदेश दिया है कि आपकी भ्रष्ट नीति, नीयत और नियम के खिलाफ आपको आगाह करते रहें। महज एक इस्तीफे से बात नहीं बनेगी। अभी तो 19 लाख नौकरी,संविदा और समान काम-समान वेतन जैसे अनेकों जन सरोकार के मुद्दों पर मिलेंगे। जय बिहार,जय हिन्द”

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा-
“मैंने कहा था ना आप थक चुके है इसलिए आपकी सोचने-समझने की शक्ति क्षीण हो चुकी है।

जानबूझकर भ्रष्टाचारी को मंत्री बनाया
थू-थू के बावजूद पदभार ग्रहण कराया
घंटे बाद इस्तीफ़े का नाटक रचाया।

असली गुनाहगार आप है। आपने मंत्री क्यों बनाया??आपका दोहरापन और नौटंकी अब चलने नहीं दी जाएगी?”

जिस तरह से पदभार संभालते ही शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा है उससे कहीं ना कहीं विपक्षी नेता के तौर पर तेजस्वी यादव की अहमियत बढ़ी है।

साथ ही साथ उनके द्वारा लगाए जा रहे इस आरोप को बल मिलता है कि नीतीश कुमार बेबस और थके हुए राजनेता हो चुके हैं। जिनके अंदर निर्णय लेने की क्षमता अब क्षीण हो चुकी है।

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