देश में चल रहे किसान आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश में न्यूज़ चैनलों और अखबारों में तरह-तरह की भ्रांतियां फैलाई जा रही है। सरकार कृषि कानूनों को किसानों के लिए हितकारी बता चुकी है। वहीं भारतीय जनता पार्टी के कई नेताओं द्वारा किसानों को आतंकी और खालिस्तानी कहा गया।

इस कड़ी में अब दैनिक जागरण अखबार के खिलाफ भी किसान समर्थकों ने मोर्चा खोल दिया है। दरअसल दैनिक जागरण किसान आंदोलन की शुरुआत से ही कृषि कानूनों के पक्ष में खबरें छापता आया है।

जिसमें किसानों को नीचा दिखाने की कोशिश भी की गई है। अब एक बार फिर से दैनिक जागरण में ऐसे आर्टिकल छापे गए हैं। जिसमें किसान आंदोलन की छवि खराब करने की कोशिश की गई है।

आपको बता दें कि दैनिक जागरण ने लेखक प्रदीप सिंह द्वारा लिखा गया एक लेख अपनी अखबार में छापा है। जिसका टाइटल है ‘जिद में तब्दील हुआ आंदोलन’।

इसी के साथ एक अन्य आर्टिकल भी छापा गया है। जिसे रमेश कुमार दुबे द्वारा लिखा गया है। इस आर्टिकल का टाइटल है ‘न्यूनतम समर्थन मूल्य का दुष्चक्र’।

इन दोनों लेखों से आप यह अंदाजा लगा सकते हैं कि दैनिक जागरण लोगों के बीच किसान आंदोलन की कैसी छवि बनाने की कोशिश कर रहा है।

इस कड़ी में पॉलीटिकल एक्टिविस्ट राजीव ध्यानी ने दैनिक जागरण का विरोध करते हुए अपने अधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर लोगों से अखबार का वहिष्कार करने की बात कही है।

उन्होंने लिखा है कि दैनिक जागरण खुलकर किसानों के खिलाफ आ गया है, अंबानी अडानी से पहले इस अखबार का बहिष्कार होना चाहिए।

दैनिक जागरण के इस आर्टिकल में यह दर्शाने की कोशिश की है कि यह पूरे देश के किसानों का आंदोलन नहीं है। बल्कि सिर्फ पंजाब, हरियाणा के एक हिस्से और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों का आंदोलन है।

इस आंदोलन को दो तरह के लोग समर्थन कर रहे हैं। एक वह जिन्होंने कभी आंदोलन नहीं देखा और दूसरे वह जिन्हें लग रहा है कि इस आंदोलन के सहारे वह अपनी ड्यूटी राजनीतिक नैया को पार लगा लेंगे।

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