केंद्र सरकार द्वारा बीते साल लाए गए तीन कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन की वजह से आने वाले विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को बड़ा नुकसान होने की आशंका जताई जा रही थी।

इसी बीच आज श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश महोत्सव के मौके पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता को संबोधित करते हुए तीनों कृषि कानून वापस लेने का ऐलान कर डाला है।

इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों के लिए एमएसपी पर भी कमेटी बनाए जाने की बात कही है।

कई विपक्षी दलों का मानना है कि मोदी सरकार द्वारा यह फैसला अगले साल उत्तर प्रदेश और पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर लिया गया है।

क्योंकि यह दोनों ऐसे राज्य हैं जहां पर किसान संगठनों द्वारा भारतीय जनता पार्टी का कड़ा विरोध किया जा रहा है।

इस मामले में शिवसेना नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने भी भारतीय जनता पार्टी की चुटकी ली है।

उन्होंने ट्वीट कर लिखा है कि आज मोदी जी ने उनके मुँह पर जोरदार तमाचा मारा, जो अपने ही देश के किसानों को आतंकवादी, खालिस्तानी, फर्जी किसान कहकर सम्बोधित कर रहे थे, चाहे वो भाजपा नेता हो या हो अंधभक्त।

इसके साथ ही आज सुबह प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए संजय राउत ने कहा “भाजपा को अभी हाल ही में उपचुनाव में हार मिली और आगे यूपी, पंजाब के चुनाव में हारने का डर था इसलिए कृषि कानून वापस लिए गए हैं।”

दरअसल बीते एक साल से चल रहे किसान आंदोलन की छवि को खराब करने के लिए कई नाकाम कोशिशें की गई थी। भाजपा समर्थक मीडिया द्वारा किसानों को आतंकी, खालिस्तानी तक करार दिया गया।

गौरतलब है कि 26 नवंबर को दिल्ली और उत्तर प्रदेश की सीमाओं पर शुरू हुए किसान आंदोलन को एक साल पूरा होने वाला है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कृषि कानूनों को वापस लिए जाने के ऐलान के बावजूद भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने यह कहा है कि जब तक संसद में कृषि कानूनों को रद्द नहीं किया जाएगा। तब तक आंदोलन खत्म नहीं होगा।

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