शहीदों के मजारों पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पे मरने वालों का बाकी यही निशां होगा। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान ये लाइन जगदंबा प्रसाद मिश्र ‘हितैषी’ ने लिखी थी। मगर आज़ादी मिलने के बाद भी अब ये लाइन देश के लिए अपनी जान देने वालों के लिए लिखी जाती है।

मगर जान सिर्फ सरहद पर ही नहीं जाती, जान तो पुलिस वालों की भी जाती है जो समाज रहकर समाज को सुरक्षित रखने की कोशिश करते है। मगर उन्हें मिलता क्या है? यहां तक की उन्हें गोली लगने के बाद अस्पताल ले जाने तक के लिए एम्बुलेंस नहीं माल धोने वाली गाड़ी का इस्तेमाल किया जाता है।

दरअसल बीते बुधवार को संभल में बदमाशों और यूपी पुलिस में मुठभेड़ हो गई। अदालत में पेशी से वापस लौट रहे कैदियों से भरी पुलिस वैन मुरादाबाद लौट रही थी। जब गाड़ी संभल के थाना बनियाठेर क्षेत्र से होकर गुजर रही ठीक उसी वक़्त बदमाशों ने कैदियों से भरी पुलिस वैन पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी।

कोई कुछ समझ पाता उससे पहले हमले में 2 पुलिसकर्मियों को गोली लग चुकी थी। बेखौफ बदमाशों ने तीन कैदियों को वैन से निकाला और फिर फरार हो गेट। पुलिस को इस मामले की सूचना मिले तो बड़े अधिकारी मौके पर पहुंचे जहां उन्होंने दोनों मृत पुलिसकर्मियों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए गए हैं।

अब समाजवादी पार्टी की नेता ऋचा सिंह ने पुलिसकर्मियों की फोटो को शेयर किया है और लिखा- सच तो ये है कि आपका लिए शहीद और शहादत के कोई मायने ही नहीं हैं। शहादत का इतना अपमान?? कल संभल में शहीद हुए 2 पुलिसकर्मियों को उत्तर प्रदेश की सरकारी व्यवस्था एम्बुलेंस तक नहीं उपलब्ध करा सकी,शव को लोडर में डालकर ले जाया गया। पूरी सरकार और प्रशासनिक व्यवस्था को शर्म आनी चाहिये।