Sakshi Joshi
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प्रवासी मज़दूरों की मदद के लिए अाई कांग्रेस की 1000 बसों को योगी सरकार द्वारा परमिशन ना मिलने के बाद वापस भेज दिया गया है। ये बसें यूपी बॉर्डर पर तकरीबन 33 घंटे तक खड़ी रहीं, लेकिन इनका इस्तेमाल मज़दूरों की मदद के लिए नहीं किया गया।

सरकार ने कांग्रेस से इन बसों के पेपर्स और ड्राइवर की डिटेल्स मांगी, जिसे पार्टी ने दे दिया। इसके बाद तुरंत ही सरकार ने सभी हज़ार बसों के पेपर्स की जांच कराई और इनमें से कुछ बसों को अनफिट करार दे दिया। सरकार ने बिना किसी देरी के ये बयान जारी कर दिया कि पेपर्स की जांच में कई बसें अनफिट पाई गई हैं, इसलिए इन्हें चलने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

सरकार द्वारा बसों के पेपर्स की जांच किए जाने पर कई तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि लॉकडाउन की वजह से जब इंश्योरेंस, परमिट और रिपेयरिंग का काम ठप्प पड़ा हुआ है, ऐसे समय में पेपर्स की मांग सरकार की मंशा को साफ कर देती है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि सरकार जान बूझकर पेपर्स में खामी निकालकर बसों को चलने से रोक रही है।

सवाल ये है कि आखिर सरकार को कांग्रेस से मदद लेने में आपत्ति क्या है? भाषणों में संकट के समय में विपक्ष से कांधा मिलाकर चलने की अपील करने वाली बीजेपी को मज़दूरों की मदद को लेकर विपक्ष के साथ आने पर ऐतराज़ क्यों हुआ?

अब इस मामले पर पत्रकार साक्षी जोशी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा- ‘चूंकि मैं पत्रकार हूं मेरा काम है सवाल पूछना मैं आज कांग्रेस की राजस्थान सरकार से पूछना चाहती हूं कि जब यूपी सरकार ने कोटा से छात्रों को ले जाने के लिए बसें भेजी थीं तो क्या आपने उन बसों का लाइसेंस , फिटनेस , बीमा , और तमाम तरह के दस्तावेज़ मांगे थे?’

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