मोदी सरकार को भारतीय रिजर्व बैंक की आज़ादी का सम्मान करने की नसीहत देने वाले डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने इस्तीफा दे दिया है। खास बात ये है कि उन्होंने अपने कार्यकाल पूरा होने के छह महीने पहले ही इस्तीफा दे दिया है। आचार्य ने ऐसे हालात में अपना इस्तीफा दिया है जब देश की अर्थव्यवस्था पर काले बादल मंडरा रहे है।

उनके इस्तीफे पर अभी आरबीआई विचार कर रहा है, आचार्य ने भी उर्जित पटेल की तरह इस्तीफे की वजह निजी कारण बताया है। 

दरअसल आरबीआई डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य को उम्मीद थी कि सरकार उनके कार्यकाल को आगे नहीं बढ़ाने वाली है।इसी वजह से उन्होंने वापस न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी जाकर सीवी स्टार प्रोफेसर ऑफ इकोनॉमिक्स पद पर काम करने का फैसला लिया है।

मीडिया रिपोर्ट की माने तो बीते 4 अप्रैल को घोषित मौद्रिक नीति पर आरबीआई डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य और गवर्नर शक्तिकांत दास में मतभेद देखा गया था।

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बैठक में जहां एक तरफ आर्थिक वृद्धि पर ध्यान देने की बात कर रहे थे तो वहीं दूसरी तरफ डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने ने खाद्य और ईंधन को छोड़कर उच्च मुद्रास्फीति के मद्देनजर दर में एक और कटौती पर चेतावनी दी थी।

इसके बाद छह सदस्यों वाली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने 4-2 के बहुमत से रेपो रेट को छह फीसदी से 25 फीसदी कम करने का फैसला किया था। विरल आचार्य को ऋण जोखिम मामलों के जानकार माना जाता है। ऐसे में उनका जाना गरीबी में आटा गिला होने जैसा है।

गौरतलब हो कि इससे पहले आरबीआई उर्जित पटेल ने अपना कार्यकाल पूरा होने से अपना इस्तीफा दे दिया था। अब डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने इस्तीफा दर्शाता है कि सीबीआई के बाद आरबीआई में भी सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। क्योंकि पिछले ही साल विरल आचार्य ने ब्याज दर घटाए जाने के सवाल पर विरोध जताया था। उन्होंने कहा था कि ब्याज दर ज्यादा घटाने पर कर्ज बढ़ता है जो आगे चलकर महंगाई का कारण बनता है।

उन्होंने कहा था कि यह छोटी अवधि के लिए मजबूत आर्थिक वृद्धि का भले संकेत दे लेकिन आगे इसके नतीजे बुरे हो सकते हैं। इसके चलते दीर्घ अवधि में संदिग्ध निवेश, प्रॉपर्टी की कीमतों में गिरावट और वित्तीय संकट के खतरे झेलने पड़ सकते हैं।

जिसके बाद भी सरकार ने इस साल छह जून तक आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने लगातार तीसरी बार ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट यानी 0.25 फीसदी की कटौती कर दी थी, जिससे अब अर्थव्यवस्था की रफ़्तार धीमी भी पड़ी है।