गोदी मीडिया ने अब मान लिया है कि जनता पूरी तरह मूर्ख बन चुकी है। उसका विवेक हमेशा के लिए समाप्त हो चुका है। इसलिए वह कुछ भी कहेगा और जो भी कहेगा, जनता उसे ही सच मानेगी।

सभी जानते हैं कि न्यूयार्क टाइम्स में जो ख़बर छपती है या उसके संपादकीय लेख होते हैं, उसे दुनिया के कई अख़बार भी छापते हैं। अख़बार का कई अख़बारों से करार होता है। इसके बाद भी गोदी मीडिया का दुस्साहस देखिए वह सबके सामने दो अख़बारों की तस्वीर लेकर संदेह पैदा कर रहा है कि न्यूयार्क टाइम्स में जो तस्वीर छपी है वही संयुक्त अरब अमीरात के ख़लीज टाइम्स में छपी है।

इस खेल में पत्रकार भी शामिल हो गए और ऐंकर भी। इस तरह करोड़ों दर्शकों को यह झूठ परोसा गया, उन्हें सामने से बेवकूफ बनाया गया।दर्शकों में स्वाभिमान और विवेक बचा होता तो इसी बात पर टीवी देखना हमेशा के लिए बंद कर देते।

मनीष सिसोदिया के घर पड़े CBI के छापे के संदर्भ में न्यूयार्क टाइम्स और ख़लीज टाइम्स की रिपोर्ट को लेकर विवाद करने का मतलब ही है कि जनता का बड़ा वर्ग और ख़ासकर पढ़ा लिखा वर्ग झूठ के अलावा कुछ भी स्वीकार करने लायक़ नहीं बचा है।

बीजेपी के दो सांसद प्रवेश वर्मा और मनोज तिवारी ने जब इस सवाल को उठाया कि न्यूयार्क टाइम्स की रिपोर्ट ख़लीज टाइम्स में कैसे छपी है तब इसका एक ही मक़सद था कि जिस रिपोर्ट को आम आदमी पार्टी कामयाबी बता रही है उसे लेकर विवाद पैदा कर दो।

ताकि हाउसिंग सोसायटी के व्हाट्स एप ग्रुप में और अनेक ऐसे व्हाट्स एप ग्रुप में भीतर-भीतर इसे फैलाया जाए और इसे स्थापित कर दिया जाए। यही होगा। सोसायटी के लोग शेयर करेंगे कि अरे हाँ, दो-दो अख़बार में एक ही ख़बर छप रही है। मोदी जी को बदनाम करने की साज़िश लगती है।

पिछले साल दिसंबर 2021 में इसी न्यूयार्क टाइम्स ने मोदी सरकार की नल-जल योजना के बारे में रिपोर्ट प्रकाशित किया था, जिसे कई अख़बारों ने छापा।

भारत में टाइम्स ऑफ इंडिया और अमर उजाला ने भी छापा था। तब तो गोदी ऐंकर और बीजेपी के नेता कहने नहीं आए कि मोदी जी ने पैसे देकर छपवाए हैं, दो अख़बार में एक ही रिपोर्ट कैसे छप सकती है?

क्या आप नहीं देखते हैं कि भारत में भी एक ही व्यक्ति का लेख कई अख़बारों में छपता है? रामगुहा का वही लेख हिन्दी में छपता है तो दूसरी भाषाओं में भी छपता है। यह तो एक पुरानी व्यवस्था है जिसे सिंडिकेट कहते हैं।

जिस मीडिया का काम था कि इस झूठ को बयान के रूप में दो पक्ष न दिखा कर तथ्यों को सामने रखे, वह भी प्रोपेगैंडा चलाने लगा। इसका मतलब है कि जनता और दर्शक दोनों समाप्त हो चुके हैं या बीजेपी और गोदी मीडिया की तरफ़ से मान लिए गए हैं कि अब ये अपने से नहीं सोचते, केवल विश्वास करते हैं।

जो हम कहते हैं, उसी पर विश्वास करते हैं।न्यूयार्क टाइम्स की रिपोर्ट ख़लीज़ टाइम्स में छपने के बाद इंडियन एक्सप्रेस में भी छपी है। कई और अख़बारों में छपी हो सकती है।

Our report about efforts to improve Delhi’s education system is based on impartial, on-the-ground reporting, and education is an issue that The New York Times has covered over many years. Journalism from The New York Times is always independent, free from political or advertiser influence. Other news outlets routinely license and republish our coverage.”

यह जवाब है, न्यूयार्क टाइम्स का कि उन्होंने पैसे लेकर ख़बर नहीं छापा है और उनकी रिपोर्ट दूसरे समाचार संस्थान नियमित रुप से छापते रहते हैं। यह सफ़ाई नहीं आती तब भी इस विवाद की ज़रूरत नहीं थी।

अच्छा है, हम जो कहा करते थे, उसे पूरा होते देख रहे हैं । आप समाप्त हो रहे हैं।

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