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दुनिया के 30 सबसे ज़्यादा प्रदूषित शहरों में से 22 शहर भारत के हैं। यहाँ की जनता खुली हवा में साँस नहीं ले पाती।एयर प्यूरीफायर को धका-धक बेचा जा रहा है। लेकिन केंद्र सरकार में मंत्री प्रकाश जावड़ेकर संसद में बोल रहे हैं कि प्रदूषण का मुद्दा उठाकर लोगों में डर न पैदा किया जाए। उनके हिसाब से इस मुद्दे को तूल नहीं देना चाहिए।

दरअसल पर्यावरण मंत्री से संसद में प्रदुषण के कारण कम होती लाइफ एक्सपेक्टेंसी पर सवाल पूछा गया था। उन्होनें जवाब दिया कि प्रदूषण और एक इंसान की आयु में कोई संबंध नहीं है।

प्रकाश जावड़ेकर का कहना है कि भारत में ऐसी कोई स्टडी नहीं है जिसके हवाले से कहा जा सके कि प्रदूषण और कम होते जीवनकाल में कोई संबंध है। क्या वो ऐसा कहकर प्रदूषण के अहम सवालों को टाल देना चाहते हैं?

आपको बता दें कि इंडिया टुडे के डाटा इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में वायु प्रदुषण के कारण लोगों कि ज़िन्दगी के 17 साल कम हो सकते हैं। साथ ही में ग्लोबल बर्डन ऑफ़ डिजीज, 2017 की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में वायु प्रदूषण के कारण हर तीन मिनट में एक बच्चे की मौत होती है।

हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीथारमन ने प्याज पर ऐसा बयान दिया था जिसके लिए उनकी जमकर आलोचना हुई थी। और अब पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के बयान पर लोग सवाल खड़े कर रहे हैं। ट्विटर पर रक्षा रमैया लिखते हैं, … एक तरफ निर्मला सीथारमन उस परिवार से आने की बात करती है जहाँ प्याज नहीं खाया जाता तो दूसरी तरफ जावड़ेकर को लगता है कि प्रदूषण से स्वस्थ्य पर कोई असर नहीं होता।”
कहाँ मिलेगा इतना कंटेंट?”

शायद प्रकाश जावड़ेकर को याद नहीं है कि सितंबर आते-आते मीडिया प्रदूषण की खबरों से भर जाता है, मेडिकल स्टोर्स में मास्क की बिक्री बढ़ जाती है।

शायद वो भूल गए हैं कि प्रदूषण के ही चलते कईं दिनों के लिए स्कूल बंद कर दिए जाते हैं, दिल्ली वालों को ओड-इवन जैसी नीतियों का सहारा लेना पड़ता है। वो शायद इसलिए भूल गए हैं क्योंकि उनके घर में प्रदूषित हवा की एंट्री नहीं होती होगी!

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