बीते दिनों दिल्ली और पंजाब में किसानों ने कृषि कानूनों के खिलाफ ट्रैक्टर मार्च निकाला था। किसानों ने इस मार्च के दौरान सरकार को यह चेतावनी दी थी कि अगर कृषि कानूनों को वापस नहीं लिया गया तो 26 जनवरी के मौके पर लाखों की तादाद में किसान दिल्ली में घुसकर ट्रैक्टर मार्च निकालेंगे।

वहीँ कल किसान संगठन के नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों के बीच हुई बैठक में भी कोई नतीजा नहीं निकल पाया है। इस मामले में मोदी सरकार विपक्षी दलों के साथ-साथ आम लोगों के निशाने पर भी आ गई है।

खासतौर पर पीएम मोदी की जमकर निंदा हो रही है। दरअसल अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों द्वारा की गई हिंसा पर पीएम मोदी ने चिंता जाहिर की थी। लेकिन किसानों की मौत पर एक शब्द नहीं कहा।

इस मामले में वंचित बहुजन आघाडी के अध्यक्ष और सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश अंबेडकर ने पीएम मोदी और भाजपा पर निशाना साधा है।

उन्होंने ट्वीट कर लिखा है कि “हमारे प्रधानमंत्री को अमेरिका की राजनीति पर चिंता होती है। लेकिन अपने घर से कुछ ही दूर आंदोलन कर रहे किसानों की चिंता नही है। वहाँ जो सड़क पर हुआ वो उस देश के संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ था, लेकिन यहाँ तो मोदीजी प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठकर रोज संविधान की धज्जियां उड़ा रहे है।”

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा है कि वहाँ चार लोगों की मौत पर इन्हें अफसोस होता है। लेकिन यहां हमारे 54 किसानों की आंदोलन में मौत हो गयी इसका कोई गम नहीं। इस मानसिकता के बारे में लोगों को सोचना चाहिए।

इस मामले में विपक्षी दलों ने भी चिंता जताते हुए कहा है कि कड़कती ठंड में आंदोलन कर रहे किसानों को देखकर कौन कह सकता है कि भाजपा उनके हित के बारे में सोच रही है।

आपको बता दें कि किसान और सरकार दोनों ही अपने-अपने रुख पर अड़े हुए हैं। किसानों ने साफ कह दिया है कि उन्हें इन दिनों कृषि कानूनों में कोई भी संशोधन नहीं चाहिए।

सरकार को कृषि कानून रद्द करने होंगे, वरना ये आंदोलन साल 2024 तक आंदोलन करेंगे।

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