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पिछले दिनों तमिलनाडू विधानसभा सचिवालय में स्वीपर और सफ़ाईकर्मचारियों के लिए कुल 14 पदों के लिए भर्ती निकली थी। इस नौकरी का आवेदन करने वालों में M.TECH, B.TECH, MBA, Post Graduate और Graduation किये हुए शख्स ज्यादा थे।

अब यूपी में भी यही हाल देखने को मिला है जहां पुलिस विभाग में निकली कुल 62 पदों के लिए 3700 पीएचडी धारको ने आवेदन किया है।

दरअसल जुलाई 2018 में योगी सरकार ने बढ़ती बेरोजगारी देख थोड़ी राहत देने के लिए पुलिस विभाग में नौकरियां निकाली। मगर इसमें भी पेच फंस गया है, उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग में टेलीफोन मैसेंजर के लिए कुल 62 पदों पर भर्तियां निकाली गई थीं।

हैरान करने वाली बात ये है की पद तो 62 थे मगर इसके लिए आवेदन करने वालें करीब एक लाख से ज्यादा लोग जिनमें लगभग 3700 पीएचडी धारक हैं।

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जिस पद के लिए भर्तियाँ निकाली गई उसका काम पुलिस विभाग के दस्तावेजों, चिट्ठियों और फाइलों को एक पुलिस थाने से दूसरे तक जगह पहुंचाने का होता है। इस काम के लिए आवदेक का पांचवीं पास होना जरूरी है,इस नौकरी के लिए साथ ही उसे साइकिल चलाना भी आना चाहिए।

इस भर्ती को लेकर बेरोजगारी झेल रहे एक लाख लोगों ने जब आवेदन किया तो सेलेक्शन बोर्ड भी हैरान रह गया। इन 62 पदों के लिए 1 लाख लोगों में 50 हजार Graduation, 28 हजार Post Graduate और 3,700 पीएचडी धारक हैं।

अब जब सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य की ये हालत है तो अंदाज़ा लगाया जा सकता है की दूसरे राज्यों में रोजगार का क्या होगा।

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ऐसे हालत में जब देश के प्रधानमंत्री लोकसभा में बेरोजगारी पर जवाब देतें हुए कहते है कि बीते 4 साल में असंगठित क्षेत्र में 36 लाख कमर्शल गाड़ियां, 1।5 करोड़ पैसेंजर गाड़ियां और 27 लाख नए ऑटो बेचे गए। जिन लोगों ने इन गाड़ियों को खरीदा है वे सिर्फ खड़ी करने के लिए तो नहीं हैं?

अब भले ही मोदी सरकार हर साल दो करोड़ रोजगार देने में विफल रहें हो। देश में बेरोजगारी का पिछले 45 साल का रिकॉर्ड टूट गया हो और सरकार लगातार बेरोजगारी के रिकॉर्ड दबाने की कोशिश कर रही हो मगर ऐसी घटनाओं से सरकार के उन दावों की पोल खुल ही जाती जिसमें वो हर हाथ रोजगार देने की बात कहती है।