किसान विरोधी कृषि कानून बनाने के लिए भाजपा की सरकार किसानों के साथ-साथ विपक्षी दलों के निशाने पर आ गई है। केंद्रीय मंत्री और सांसद हरसिमरत कौर ने कृषि कानून पर विरोध दर्ज करते हुए मोदी कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था।

उन्होंने कहा था कि पंजाब और हरियाणा के किसान इस कानून से खुश नहीं है। इसलिए वह मोदी सरकार के इस फैसले का विरोध करते हुए इस्तीफा दे रही है।

कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का समर्थन करते हुए भाजपा की सहयोगी पार्टी शिरोमणि अकाली दल ने एनडीए से अपना नाता तोड़ लिया। अब खबर सामने आ रही है कि राजस्थान में भाजपा की एक और सहयोगी पार्टी ने किसानों का समर्थन करते हुए एनडीए से नाता तोड़ने की चेतावनी दी है।

खबर के मुताबिक, आरएलपी के अध्यक्ष और सांसद हनुमान बेनीवाल ने मोदी सरकार को किसान विरोधी बताते हुए भाजपा से अलग होने के संकेत दे डाले हैं।

आरएलपी अध्यक्ष हनुमान बेनीवाल ने ट्वीट कर लिखा है कि “चूंकि RLP एनडीए का घटक दल है। परन्तु आरएलपी की ताकत किसान व जवान है इसलिए अगर इस मामले में त्वरित कार्यवाही नही की गई तो मुझे किसान हित मे एनडीए का सहयोगी दल बने रहने के विषय पर पुनर्विचार करना पड़ेगा !”

इसके साथ ही उन्होंने देश के गृहमंत्री अमित शाह को कहा है कि वह देश में चल रहे किसान आंदोलन की भावना को देखते हुए कृषि से संबंधित लाए गए तीन बिलों को तत्काल वापस ले।

इसके साथ ही किसानों को दिल्ली में बातचीत के लिए उनकी मर्जी के मुताबिक अनुरूप जगह दी जाए।

आपको बता दें कि सोशल मीडिया पर भी किसान आंदोलन को खूब समर्थन मिल रहा है। हालांकि भाजपा के समर्थक किसानों को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।

लेकिन किसानों के समर्थन कर रहे लोग भाजपा की जमकर निंदा कर रहे हैं।

सोशल मीडिया यूज़र्स का कहना है कि जय जवान, जय किसान की बात करने वाली भाजपा सरकार ने आज किसानों के आगे जवान खड़े किए हुए हैं।

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