भाजपा विधायक और नेता जब सरकार में होते हैं तो अलग-अलग महकमे के तमाम अधिकारी खुद पर उनका दबाव महसूस करते हैं।

इसका उदाहरण ये घटना- दरअसल जुलाई 2019 में इंदौर के भाजपा विधायक आकाश विजयवर्गीय ने जनता के बीच नंबर बनाने के चक्कर में अपना काम कर रहे और अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई कर रहे नगर पालिका अधिकारी को बैट से पीटा था।

आकाश विजयवर्गीय मध्य प्रदेश भाजपा के बड़े नेता कैलाश विजयवर्गीय के साहबजादे हैं।

2019 में मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी। जिस दौरान आकाश विजयवर्गीय पर FIR दर्ज हुई थी।

इस मामले आकाश विजयवर्गीय सहित 11 लोगो को आरोपी बनाया गया था।

तीन साल बाद जब मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार है तो पीड़ित अधिकारी ने कोर्ट में आकाश विजयवर्गीय को पहचाने से मना कर दिया और कहा कि जब ये पूरी घटना घटी और उनको पीछे से बैट से मारा गया तो वह फ़ोन पर बात कर रहे थे। पीछे से हमला होने के कारण वो बैट से मारने वाले व्यक्ति को पहचान नहीं पाए।

ये पूरा मामला वीडियो में रिकॉर्ड हुआ था जिसमें साफ़ तौर पर आकाश विजयवर्गीय नगर पालिका अधिकारी को मारते हुए नजर आ रहे हैं।

मामले में ये सबसे बड़ा सबूत है पर पीड़ित अधिकारी क्या करे प्रदेश में भाजपा सरकार है। विधायक जी से बैर लेकर नौकरी भी तो नहीं कर पाएगा! इसलिए उसने आकाश विजयवर्गीय को पहचाने से ही मना कर दिया।

ये खबर आने के बाद अब एक बार फिर मामला तूल पकड़ने लगा है सोशल मीडिया पर यूजर घटना का वीडियो ट्वीट कर मध्य प्रदेश सरकार और आकाश विजयवर्गीय पर सवाल उठा रहे हैं।

शायद पीड़ित अधकारी दबाव में आकर मामला वापिस भी ले लें मगर जनप्रतिनिधियों का प्रशासनिक कार्य में बाधा डालना एक ख़तरनाक परम्परा है।

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