रूपेश कुमार सिंह

इस व्यक्ति का नाम था रोहित पासी (उम्र 40 वर्ष), इन्होंने अपनी बेटी के साथ लगातार हो रही छेड़खानी की शिकायत पुलिस से की। पुलिस ने कोई एक्शन नहीं लिया और निराश व हताश होकर 22 जुलाई की शाम में ये अपने घर के एंगल से गले में गमछा बांधकर लटक गये मतलब कि इन्होंने आत्महत्या कर ली। विभिन्न समाचारपत्रों में छपी खबर के अनुसार, रोहित पासी

झारखंड के धनबाद जिला के झरिया थानान्तर्गत भगतडीह परसाटांड़ में अपनी पत्नी अनिता देवी और दो बेटी के साथ रहते थे। ये राजमिस्त्री का काम कर दोनों बेटियों को झरिया के एक निजी विद्यालय में पढ़ा रहे थे। इनकी बड़ी बेटी 10वीं में पढ़ती है और जब वे ट्यूशन पढ़ने जाती थी, तो रास्ते में कुछ लोग उसके साथ छेड़खानी करते थे।

जब यह बात रोहित और उनकी पत्नी को पता चला, तो छेड़खानी करने वाले सभी लड़कों के घर पर जाकर शिकायत की, लेकिन उसके घरवालों ने अपने लड़कों को कुछ नहीं किया। इधर लड़कों ने उसकी बेटी का मोबाईल नंबर भी किसी से ले लिया और फोन करके शादी करने को बोलने लगा। तंग आकर रोहित ने अपनी बेटी को मामा के पास भेज दिया और उनकी पत्नी ने 18 जुलाई को झरिया थाना में इस बावत शिकायत की।

अनिता देवी के अनुसार पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं किया और इधर पुलिस में शिकायत की खबर सुनकर छेड़खानी करने वाले लड़कों द्वारा रोहित को सपरिवार जान से मारने की धमकी देने लगा। रोहित की पत्नी अनिता देवी के अनुसार पुलिस द्वारा छेड़खानी करने वाले लड़कों पर कोई कार्रवाई ना करने से रोहित टूट गया।

रोहित ने अपनी पत्नी से कहा कि अब किसके दरवाजे पर गुहार लगाउं, अब इससे अच्छा होगा कि जिंदगी ही खत्म कर लूँ और फिर 22 जुलाई को उन्होंने आत्महत्या कर ली। क्या हम इसे आत्महत्या मानेंगे या फिर पुलिस की लापरवाही व गैरजिम्मेदाराना रवैये से हुई हत्या? क्या रोहित की आत्महत्या के लिए पुलिस जिम्मेदार नहीं है?

झारखंड के मुख्यमंत्री Hemant Soren से मांग की जा रही है कि अविलंब झरिया थानेदार को बर्खास्त कर उसे रोहित पासी की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया जाए।

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