महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार ने राज्य में किसी भी मामले को लेकर चल रही सीबीआई जांच पर बड़ा फैसला सुनाया है। खबर के मुताबिक, उद्धव ठाकरे की सरकार ने सीबीआई को दी गई आम सहमति वापस ले ली है।

जिसके बाद अब सीबीआई को राज्य में किसी भी मामले की जांच से पहले ठाकरे सरकार से परमिशन लेनी पड़ेगी।

बताया जा रहा है कि ठाकरे सरकार ने एक कानून के तहत राज्य में शक्तियों और न्यायक्षेत्र के इस्तेमाल की सहमति को वापस लेने से संबंधित आदेश जारी किए हैं।

माना जा रहा है कि ठाकरे सरकार ने ये फैसला सुशांत सिंह राजपूत और हाल ही में सामने आए टीआरपी स्कैम के बाद लिया है। गौरतलब है कि सुशांत मामले में पहले मुंबई पुलिस द्वारा जांच की जा रही थी।

इसके साथ ही टीआरपी स्कैम का खुलासा भी मुंबई पुलिस द्वारा किया गया है। जिसमें रिपब्लिक टीवी समेत तीन चैनलों पर लोगों को पैसे देकर फर्जी टीआरपी बटोरने का आरोप लगा है।

इस मामले में महाराष्ट्र की महाविकास आघाडी सरकार ने कहा है कि किसी भी राज्य के पास अपना एक विशेष अधिकार होता है। जिससे वह स्थानीय मामलों की जांच के लिए सीबीआई को जांच से पहले राज्य की सरकार से इजाजत लेने का आदेश जारी कर सकता है।

आपको बता दें कि सुशांत मामले में मुंबई पुलिस की जांच पर सवाल उठाए गए थे। जिसके बाद केंद्र सरकार ने सुशांत के परिवार की मांग पर सीबीआई जांच के आदेश जारी किए थे।

इस मामले में शिवसेना की तरफ से यह भी आरोप लगाया गया था कि मोदी सरकार गैर भाजपा राज्यों में सरकारों को परेशान करने के लिए सरकारी जांच एजेंसियों का गलत इस्तेमाल करती है।

शिवसेना का कहना है मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे द्वारा लिए गए इस फैसले ने भाजपा को हिलाने का काम किया है।

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