अयोध्या में झाड़-फ़ूँक के बहाने 20 साल की एक दलित लड़की से रेप का मामला सामने आया है। इस आरोप में सियावल्लभ कुंज के महंत हनुमान दास को शुक्रवार को हिरासत में लिया गया।

ये घटना 6 जुलाई की है, जिसकी सूचना 7 जुलाई को मिली। माना जा रहा है कि सियावल्लभ कुंज में पिछले कई सालों से ये महंत झाड़-फूंक का काम चला रहा है।

पीड़िता की मानें तो उसके माँ-बाप उसे महंत के पास प्रेम प्रसंग से मुक्ति दिलाने के नाम पर झाड़ फूंक करवाने आए थे।

उसका कहना है कि वो दिल्ली के एक लड़के से प्यार करती है जो उसके माता पिता को मंज़ूर नहीं था।

पीड़िता के माता पिता का कहना है कि वो चाहते थे कि उनकी बेटी उनके पसंद के लड़के से शादी करे। इसलिए 6 जुलाई को उसको झाड़-फूंक कराने के लिए महंत हनुमान दास के पास लाए थे, जिससे वो इस प्रेम बंधन से बाहर निकल सके।

उन्होंने बताया कि जब उनकी बेटी महंत के पास पहुंची, तो पहले महंत ने उससे सब कुछ पूछा। फिर झाड़-फूंक कर प्रेम का भूत उतारने के लिए कहा।

इसके बाद महंत ने उनकी बेटी को अपने कमरे में रोक लिया और उन्हें राम की पैड़ी की नहर में पैर लटका कर बैठने के लिए भेज दिया।

आपको बता दें कि इस बात की पुष्टि पुलिस जांच में सीसीटीवी में की जा चुकी है और पीड़िता ने आरोपी महंत सहित एक और पंडित पर रेप का आरोप लगाया है।

जानकारी के मुताबिक, एसएसपी प्रशांत वर्मा के निर्देश पर ही सीओ अयोध्या राजेश तिवारी ने महंत हनुमान दास की शुक्रवार सुबह को गिरफ़्तारी की और अभी भी पुलिस आगे जांच में जुटी हुई है। ये बात ध्यान देने वाली है कि आरोपी महंत खुद तीन बेटियों का पिता है।

नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो की 2020 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर 16 मिनट में एक रेप केस दर्ज किया जाता है। “लोग इतना घिनोना अपराध करने की क्षमता इसलिए करपाते क्योंकि उन्हें पकड़े जाने का डर नहीं है और अगर वह पकड़े भी जाते है तो कुछ ही दिन में छूट जाते है।”

टाइम्स ऑफ इंडिया के मार्च 2022 के एक आर्टिकल में समाज सेवक प्रज्ञान मोहंती ने कहा।

इसी के साथ ज़रूरी बात ये भी है कि किस तरह से आज भी इस देश में करोड़ों लोग झाड़ -फूंक पर भरोसा करते हैं और इसी भरोसे का गलत फायदा हनुमान दास जैसे ना जाने कितने ही महंत कई वर्षो से उठाते चले आ रहे है।

इस मामले में मां-बाप की भूमिका पर भी सवाल उठता है जो लड़की को महंत के पास सिर्फ इसलिए लेकर आए कि वो किसी लड़के से प्रेम करती है। बालिग लड़की के अधिकार को बीमारी समझने वाले मां बाप दरअसल खुद पितृसत्ता नाम की महामारी से ग्रसित हैं, जिनका उपचार भारतीय दण्ड संहिता की तमाम धाराओं से विधिवत किया जा सकता है।

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