केंद्र में सत्तारूढ़ मोदी सरकार शासनकाल में ‘फ्रीडम ऑफ़ स्पीच’ और ‘फ्रीडम ऑफ़ एक्सप्रेशन’ पर खतरा मंडरा है।

दरअसल जब भी मोदी सरकार की जन विरोधी नीतियों के खिलाफ लोग आवाज़ उठाते हैं तो उसे दबाए जाने की कोशिश की जाती है।

विपक्षी दलों द्वारा भी इस मुद्दे पर भाजपा सरकार को घेरा जाता है। विपक्षी दलों ने कई बार ये आरोप लगाए हैं कि साल 2014 के बाद अब तक मोदी सरकार द्वारा कई ऐसी नीतियां लागू की गई हैं।

जो देश की जनता के लिए नुकसानदायक साबित हुई है। इनमें खासतौर पर छात्र वर्ग, किसान वर्ग और मजदूर वर्ग के लोग शामिल हैं।

इस मामले में पत्रकार रोहिणी सिंह ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। रोहिणी सिंह ने ट्वीट किया है कि “किसान आंदोलन करेंगे तो डीजल देने पर रोक लग जाएगी, शिक्षक आंदोलन करेंगे तो सैलरी काट ली जाएगी, छात्र आंदोलन करेंगे तो लाठियाँ बरसायी जाएँगी और मीडिया अगर इसपर कुछ लिखना चाहे तो FIR कर दी जाएगी।

इस 26 जनवरी को आधिकारिक घोषणा ही कर देनी चाहिए कि देश में इस वक्त ‘आपातकाल’ लागू है।”

 

बता दें, मोदी सरकार द्वारा लाए गए कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन को बदनाम किए जाने की कोशिश की जा रही थी। लेकिन पंजाब और हरियाणा के किसान डटकर भाजपा का सामना कर रहे हैं।

26 जनवरी को किसान संगठनों द्वारा दिल्ली में ट्रैक्टर परेड निकाली जाएगी। इसी बीच उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने यूपी के किसानों को रोकने के लिए अजीबोगरीब फरमान सुनाया है जिसके तहत पेट्रोल पंपों को किसानों को डीजल न देने के आदेश दिए हैं।

गौरतलब है कि नवंबर के महीने में शुरू हुए इस किसान आंदोलन में दिल्ली और हरियाणा के बॉर्डर पर खट्टर सरकार द्वारा किसानों के खिलाफ क्रूर कार्यवाही की गई थी।

इस दौरान हरियाणा पुलिस ने किसानों को रोकने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले भी छोड़े थे

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