यूं तो देश के पांच राज्यों में आज विधानसभा चुनाव के नतीजे आए हैं लेकिन जिस प्रकार से भारत के प्रधानमंत्री ने पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव को अपनी प्रतिष्ठा का विषय बना लिया था और ममता बनर्जी को परास्त करने के लिए गलत सही का भेद भुला बैठे थें, बंगाल की जनता ने उन्हें अपना फैसला सुना दिया है।

पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में पीएम मोदी ने जिस अशोभनीय तरीके से दीदी ओ दीदी कहकर उन्हें चिढ़ाने और अपमानित करने का प्रयास किया, उसे बंगाल की जनता ने खारिज कर दिया है।

वरिष्ठ पत्रकार प्रियदर्शन ने बंगाल के चुनावी नतीजों पर अपनी राय व्यक्त करते हुए ट्वीटर पर लिखा है कि “आवारा लड़कों की तरह दीदी दीदी पुकारने वालों को बंगाल की जनता ने बता दिया है कि दीदी को कैसे आवाज देते हैं. कैसे दीदी का सम्मान करते हैं”

प्रियदर्शन ने भाजपा और पीएम मोदी के चुनाव अभियान पर निशाना साधते हुए बताया कि इस बार का बंगाल चुनाव भाजपा के राजनीतिक और वित्तीय व्यय के लिए ही नहीं बल्कि अभद्र भाषा के लिए भी याद किया जाएगा।

सीएम ममता बनर्जी ने भी आक्रामकता का परिचय दिया, बावजूद इसके लिए वो इंसान लगती रहीं।

मालूम हो कि पश्चिम बंगाल अपनी सभ्यता, संस्कृति और भद्रलोक की वजह से देश भर में अपनी अलग पहचान रखता है। बंगाली मानुष न अपशब्द बोलता है और अपशब्दों को बर्दाश्त कर सकता है।

भारतीय संस्कृति में भी महिलाओं को प्रारंभ से देवी का दर्जा दिया गया है और उन्हें सम्मान और आस्था की दृष्टि से देखा जाता है। वैसे प्रदेश में जाकर पीएम मोदी ने ममता बनर्जी के खिलाफ अभद्रता दिखाना शुरु किया और उनके विरुद्ध अपशब्दों का प्रयोग करने लगें।

पीएम मोदी ने मां माटी मानुष वाले प्रदेश में दीदी ओ दीदी कहकर ममता बनर्जी को अपमानित किया. बंगाली मानुष ने इसका जवाब भी वोटों के माध्यम से दे दिया।

इतना ही नहीं पीएम मोदी के दीदी ओ दीदी वाले बयान ने पश्चिम बंगाल का माहौल भी खराब कर दिया।

राज्य के अलग अलग हिस्सों से खबर आने लगी कि आवारा लड़के राह चलती महिलाओं को परेशान करने और फब्तियां कसने के लिए पीएम मोदी के इस नारे का प्रयोग करने लगे थे।

इसे लेकर कई बंगाली संगठनों ने आपत्ति भी जताई थी और पीएम मोदी के खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराया गया था।

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