बीते दिनों उजागर हुए पेगासस जासूसी मामले पर सरकार लगातार विपक्ष के निशाने पर बनी हुई है। इजराइली स्पाइवेयर पेगासस के जरिए भारत के कई नेताओं, पत्रकारों और अधिकारियों की जासूसी करवाई गई है।

भारत के साथ-साथ इस जासूसी मामले में कई अन्य देशों के नाम भी शामिल है।

बताया जाता है कि पेगासस का इस्तेमाल फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की संभावित जासूसी के लिए भी किया गया है। जिसके चलते फ्रांस सरकार ने जहां पेगासस मामले की जांच करवाए जाने के आदेश दिए हैं।

वहीं भारत में संसद में इस मुद्दे पर सिर्फ बहस और चर्चा किए जाने के लिए विपक्षी पार्टियां एड़ी चोटी का जोर लगा रही है।

इसी बीच खबर सामने आई है कि पेगासस तैयार करने वाली इजरायली कंपनी एनएसओ ग्रुप के दफ्तरों पर इजराइली अथॉरिटीज द्वारा रेड की गई है।

इसकी जानकारी खुद एनएसओ ग्रुप में देते हुए कहा है कि इजराइली अथॉरिटीज द्वारा उनकी कंपनी का इंस्पेक्शन किया गया था। दरअसल पेगासस जासूसी मामले के सामने आने के बाद इजरायली अथॉरिटीज इसकी जांच पड़ताल पूरी पारदर्शिता के साथ कर रही है।

इस संदर्भ में एनएसओ के प्रवक्ता ने इसे पूरी जानकारी देते हुए कहा है कि इजरायली रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने हमारे दफ्तरों में विजिट किया था। हम उनकी इस जांच का पूरे दिल से स्वागत करते हैं।

दरअसल एनएसओ द्वारा पेगासस के जरिए जासूसी किए जाने के आरोपों को पहले भी खारिज किया गया था और अब भी इस आरोप को बेबुनियाद बताया जा रहा है।

एनएसओ का कहना है कि इजराइली अथॉरिटीज द्वारा की जा रही जांच से यह सामने आ जाएगा की इसके जरिए कोई जासूसी नहीं हुई है।

इसके साथ ही कंपनी का कहना है कि इसका इस्तेमाल सिर्फ खुफिया एजेंसियों और कानूनी संस्थानों द्वारा किया जाता है। इसके अलावा एनएसओ दुनिया भर के देशों की सरकारों को साइबर सुरक्षा उपकरण भी मुहैया करवाती है।

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