देश में कोरोना महामारी के बीच त्योहारों की धूम चल रही है। इसी बीच कल रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने रिपोर्ट जारी की है।

जिसके मुताबिक, भारत इतिहास में पहली बार वित्त वर्ष 2020-21 में आर्थिक मंदी का सामना कर रहा है। जिसने मोदी सरकार के विकास के खोखले दावों की पोल खोल दी है।

कोरोना महामारी के दौरान लगे लॉकडाउन में देश की अर्थव्यवस्था लगातार गिरती जा रही है। जिसपर विपक्षी नेताओं ने कई बार चिंता जाहिर की है।

अब खबर सामने आ रही है कि देश के लोगों को महंगाई की मार झेलनी पड़ सकती है।

दरअसल अक्टूबर महीने में अंडे और सब्जियों के दामों में बड़ी बढ़ोतरी के कारण भारत में खुदरा महंगाई साढ़े छह साल के उच्चतम स्तर 7.61 प्रतिशत पर आ पहुंची है।

सरकार द्वारा जारी किए गए कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर 2020 में खुदरा महंगाई 7.27 प्रतिशत थी। सितंबर के बाद अब अक्टूबर में भी खुदरा महंगाई दूसरी बढ़ी है।

इससे पहले साल 2014 में जब मोदी सरकार सत्ता में आई थी। तब मई के महीने में खुदरा महंगाई का उच्च स्तर 8.33 प्रतिशत तक गया था।

देश के अर्थशास्त्री देवेंद्र कुमार पंत का कहना है कि कोरोना महामारी की वजह से कुछ क्षेत्रों में महंगाई बढ़ी है।

आने वाले कुछ महीनों तक इतने कम होने की बिल्कुल भी उम्मीद नहीं की जा सकती। इससे पहले मोदी सरकार प्याज के बढ़ रहे दामों को लेकर भी जनता के निशाने पर आ चुकी है।

बताया जा रहा है कि महंगाई में बढ़ोत्तरी में मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों के कारण हुई है।

आँकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर 2020 में सालाना आधार पर सब्जियों के दाम 22.51 प्रतिशत बढ़ गई है। जिसकी सीधा नुकसान गरीब वर्ग के लोगों को हो रहा है। क्यूंकि अब लोग मोदी सरकार के राज में त्यौहार भी नहीं मना पा रहे हैं।

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