Imran Pratapgarhi
Imran Pratapgarhi

महाराष्ट्र के औरंगाबाद में ट्रेन की पटरी पर रौंदे जाने से 16 मजदूरों की जान चली जाने के बाद देशभर में कोहराम मचा हुआ है। मातम के इस माहौल में सवाल किया जा रहा है कि आखिर ऐसी घटनाओं के लिए जिम्मेदार कौन है।

लॉकडाउन के डेढ़ महीने बाद भी अगर मजदूर अपने घर पहुंचने के लिए पैदल चलने को मजबूर है तो क्या इसके लिए सरकार जिम्मेदार नहीं है ?

हर रोज पैदल चलते हुए 5 रिश्ते हुए हजारों मजदूरों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है क्या यह सब सरकार को दिखाई नहीं देती हैं ?

इन्हीं सवालों का जवाब देता हुआ दिखाई देता है इमरान प्रतापगढ़ी का यह ट्वीट, जिसमें वो इस घटना को महज एक दुर्घटना मानने से इंकार कर रहे हैं।

रेल पटरी पर बिखरी मज़दूर भाईयों की लाशों को आप दुर्घटना मानिये, मैं इसे लॉकडाउन की वेदी पर सरकार द्वारा ली गई बलि मानता हूँ एैसी ही बलि नोटबंदी में भी ली गई थी जनता कर्फ्यू की शाम अगर देश को बता दिया होता कि लॉकडाउन लगेगा अपने अपने घर जाओ तो आज ये मौतें ना होतीं । #मज़दूर

बताया जा रहा है कि यह मजदूर महाराष्ट्र मध्यप्रदेश की ओर अपने घर जा रहे थे। रेल की पटरी पकड़े पैदल चलने वाले इन मजदूरों को कितनी ज्यादा थकान लगी होगी कि बेबसी में ट्रेन पटरी पर ही बेसुध पड़े रह गए। सुबह के वक्त एक मालगाड़ी आती है और गरीबों के शरीर के चिथड़े हो गए।

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