देश में इस वक्त कोरोना संक्रमण के आंकड़े 51 लाख की संख्या पार कर चुके हैं। भारत सरकार इस महामारी को कंट्रोल कर पाने में असमर्थ नजर आ रही है। इसी बीच इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने मोदी सरकार द्वारा दिए गए एक बयान पर नाराजगी जाहिर की है।

दरअसल सरकार ने संसद में यह कहा था कि उनके पास कोरोना के चलते जान गंवाने वालों या इससे संक्रमित होने वाले डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ का कोई डेटा नहीं है।

दिलचस्प बात यह है कि मोदी सरकार ने हाल ही में यह बयान भी दिया था कि कोरोना महामारी के दौरान मरने वाले प्रवासी मजदूरों का भी कोई आंकड़ा उनके पास मौजूद नहीं है।

आपको बता दें कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन द्वारा एक प्रेस रिलीज जारी की गई है। जिसमें यह कहा गया है कि अगर मोदी सरकार कोरोना संक्रमित होने वाले डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ का डेटा नहीं रखती।

अगर सरकार यह आंकड़े नहीं रखती कि इससे जुड़े कितने मेडिकल कामगारों ने अपनी जान इस वैश्विक महामारी के चलते गंवाई हैं। तो महामारी एक्ट 1897 और डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट लागू करने का नैतिक अधिकार खो देती है।

इस वैश्विक महामारी के दौरान डॉक्टर और मेडिकल कामगार राष्ट्रीय कर्तव्य का पालन कर रहे हैं। इस दौरान डॉक्टर न सिर्फ खुद भी संक्रमित हो रहे हैं। बल्कि उनके परिवार पर भी संक्रमण का खतरा मंडराता है।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने 382 डॉक्टर की लिस्ट जारी की जिनकी जान कोरोना के चलते गई।

इसके साथ ही इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने मोदी सरकार के आगे 4 मांगे रखी है। यह मांगे हैं कि कोरोना की वजह से मरने वाले डॉक्टर को शहीद का दर्जा दिया जाए। सरकार इनके परिवारों को मुआवजा भी दे। सरकार नर्सों व अन्य हेल्थ केयर वर्कर प्रतिनिधि से भी ऐसा डेटा ले।

अगर पीएम मोदी इस बात को उचित समझे तो हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष को बुलाकर उनकी चिंताएं समझे और उनसे सुझाव भी ले।

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