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Air India

देश की अर्थव्यवस्था और जीडीपी का दिवालिया निकालने के बाद अब पीएम मोदी के मंत्री सरकारी कंपनियों को बेचने और खरीदने तक की बात करने लगे हैं। भारी कर्ज में डूब चुकी सरकरी विमानन कंपनी एयर इंडिया को मोदी सरकार बेचने की पूरी कोशिश कर रही है। गुरुवार को रेल और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि अगर वह मंत्री नहीं होते, तो एयर इंडिया को खरीदने के लिए बोली लगा रहे होते।

पीयूष गोयल गुरुवार ओज दावोस में विश्व आर्थिक सम्मेलन (World Ecomomic Forum) में पहुंचकर बोल रहे थे। इस दौरान ‘भारत का रणनीतिक दृष्टिकोण’ विषय पर बोलते हुए गोयल ने कहा कि, “अगर मैं मंत्री न होता तो, एयर इंडिया के लिए बोली लगा रहा होता। एयर इंडिया के पास दुनिया भर में सबसे बाईलेटरल सहयोगी हैं। मेरे विचार में बेहतर प्रबंधन और कार्यक्षमता के साथ एयर इंडिया के ढेरों अच्छे विमानों का इस्तेमाल हो सकता है। इससे बाईलेटरल के जरिए दुनिया भर में अच्छी संभावनाएं बन सकती हैं। मेरी दृष्टि से वह सोने की खान से कम नहीं है।”

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पिछले साल दिसम्बर में एयर इंडिया के एक सीनियर अधिकारी बोल चुके हैं कि, “अगर एयर इंडिया के लिए जल्द अगले जून तक कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया तो ये राष्ट्रीय विमान कंपनी बंद हो जाएगी।” बता दें कि मोदी सरकार में सरकारी कंपनी बीएसएनएल/एमटीएनएल बर्बाद होने के बाद अब देश की सबसे बड़ी सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया अगले 6 महीने में बंद हो सकती है।

गौरतलब है कि 30 दिसम्बर को मोदी सरकार पर कटाक्ष करते हुए एयर इंडिया के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा था कि, टुकड़ों में व्यवस्था करने से काम नहीं चलेगा। अधिकारी ने ये भी कहा कि, खड़े किए जा चुके 12 विमानों को दोबारा उड़ाने के लिए भी फंड की जरुरत है, जल्दी फंड नहीं मिला तो एयर इंडिया का भी हाल जेट एयरवेज जैसा हो सकता है। कर्ज के बोझ में दबी सरकारी एयरलाइन कंपनी को अगर कोई जल्द खरीदार नहीं मिला तो जून तक बंद हो सकती है।

अधिकारी ने कहा था, हमने संचालन आवश्यकताओं के लिए सरकार से 2,400 करोड़ रुपये की मांग की थी, लेकिन सरकार ने केवल 500 करोड़ रुपए पर हामी भारी है। जबकि यूपीए की मनमोहन सरकार ने 2012 में एयर इंडिया को 10 साल के लिए 30 हजार करोड़ रुपए की मदद की घोषणा की थी।

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6 साल में भारतीय अर्थव्यवस्था सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। खास बात ये है कि 6 साल से केंद्र की सत्ता में बीजेपी की मोदी सरकार काबिज है। सरकारी कंपनियों को बेचे जाने के सवाल पर पीयूष गोयल ने सारा ठीकरा पिछली सरकारों पर फोड़ दिया। उन्होंने कहा, पहले कार्यकाल में मोदी सरकार को खस्ताहाल अर्थव्यवस्था मिली थी। अब अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए जरुरी कदम उठाए जा रहे हैं।

2014 में जब मोदी को सत्ता मिली थी तक भारत की जीडीपी 7।4 प्रतिशत थी। 6 साल सरकार चलाने के बाद मोदी सरकार में अब भारत की जीडीपी 5 प्रतिशत पर आ लुढ़की है। इसके बावजूद वित्तमंत्री रह चुके पीयूष गोयल पिछली सरकार पर आरोप लगा रहे हैं।

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