पर्यावरण कार्यकर्ता दिशा रवि की ज़मानत याचिका पर 20 फरवरी को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई हुई।

दिल्ली पुलिस ने दिशा पर राजद्रोह का आरोप लगाते हुए कोर्ट से दिशा को ज़मानत नहीं दिए जाने की मांग की। वहीं दिशा के वकील ने पुलिस के आरोप को बेबुनियाद बताया है। इस मामले में कोर्ट अपना फैसला 23 फरवरी को सुनाएगा।

कोर्ट में सुनवाई के दौरान दिशा की ओर से ये साफ़ कर दिया गया कि वो तमाम प्रताड़नाओं के बावजूद भी किसानों के हक़ में आवाज़ उठाना बंद नहीं करेंगी।

दिशा के वकील सिद्धार्थ अग्रवाल ने कोर्ट में कहा, “अगर किसान प्रदर्शन के बारे में दुनियाभर में बताना राजद्रोह है, तो मैं जेल में बेहतर हूं। अगर कोई व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से मिलता है, तो उस पर अलगाववादी होने का कोई ठप्पा तो नहीं लगा होता है”।

रवि के वकील ने पुलिस के उस आरोप को भी गलत बताया कि उनकी मुवक्किल के प्रतिबंधित खालिस्तानी संगठन से संबंध हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है। सिर्फ मुलाकात से कोई अपराधी नहीं हो जाता।

उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस ने किसानों के मार्च के लिए अनुमति दी, जबकि पुलिस दावा कर रही है कि रवि ने लोगों से जुड़ने के लिए कहा तो वह कैसे देशद्रोही हो गई।

दिशा के वकील ने कहा कि यह दिखाने के लिए कोई सबूत नहीं है कि किसानों के मार्च के दौरान हिंसा के लिए टूलकिट जिम्मेदार है।

उन्होंने एफआईआर पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि लोग किसी विषय पर अलग नज़रिया रख सकते हैं। एफआईआर में आरोप है कि योग और चाय को निशाना बनाया जा रहा है। क्या यह अपराध है?

वहीं दिल्ली पुलिस के वकील ASG सूर्यप्रकाश वी. राजू ने दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि टूलकिट के पीछे साजिश साफ नजर आती है। यह आपको ऐसी साइटों पर ले जाया गया जो इंडियन आर्मी को बदनाम करती हैं।

सरकारी वकील ने कहा कि केस ये नहीं है कि दिशा रवि खालिस्तानी हैं लेकिन उनके खालिस्तानियों से लिंक हैं।

दिल्ली पुलिस के वकील की इस दलील पर कोर्ट के एडिशनल सेशन जज धर्मेंद्र राणा ने पूछा कि मंदिर का चंदा मांगने डकैत के पास जाऊं तो क्या मैं डकैती में शामिल माना जाऊंगा?

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