दिल्ली हिंसा मामले में UAPA (गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम कानून) के तहत गिरफ्तार छात्र कार्यकर्ता गुलफिशा फातिमा ने दिल्ली की एक अदालत में आरोप लगाया था कि जेल अधिकारी उसके खिलाफ सांप्रदायिक टिप्पणी करते हैं और उसे मानसिक यातना देते हैं।

गुलफिशा के इन्हीं आरोपों को लेकर दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने तिहाड़ जेल अधीक्षक को निर्देश दिया है कि ज़रूरत पड़ने पर स्टॉफ को बदला जाए।

कोर्ट ने कहा कि जेल अधीक्षक द्वारा दर्ज कराई गई स्टेटस रिपोर्ट और दलीलों को सुनने के बाद ये तो तय है कि जेल कर्मचारियों और आवेदक के बीच बहस हुई है।

इसलिए किसी भी टकराव से बचने के लिए जेल अधीक्षक आवेदक (गुलफिशा फातिमा) का वार्ड बदलें या फिर स्टॉफ की ड्यूटी बदलें।

ग़ौरतलब है कि MBA ग्रेजुएट फातिमा उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फरवरी में हुई सांप्रदायिक हिंसा से जुड़े एक मामले में तिहाड़ जेल में बंद हैं।

छात्रा ने सितंबर में वीडियो कॉन्फ्रेंस के ज़रिए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत के समक्ष पेश हुई थीं। इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया था कि जेल में कर्मियों द्वारा उनके साथ भेदभाव और उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है।

छात्रा ने कहा था, ‘जेल में मुझे एक समस्या हो रही है। जब से मैं यहां लाई गई हूं मैं लगातार जेल कर्मियों के द्वारा भेदभाव का सामना कर रही हूं। वे मुझे शिक्षित आतंकवादी कहकर पुकारते हैं और मुझ पर सांप्रदायिक टिप्पणी करते हैं।

मैं यहां मानसिक प्रताड़ना का सामना कर रही हूं। यदि मैं खुद को कोई नुकसान पहुंचाती हूं तो इसके लिए सिर्फ जेल अधिकारी जिम्मेदार होंगे।’

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