बीते दिनों देश के उद्योगपति गौतम अडानी के मालिकाना हक के तहत आने वाले गुजरात के कच्छ के मुंद्रा पोर्ट पर ड्रग्स की बड़ी खेप पकड़ी गई थी।

खबर के मुताबिक, 16 सितंबर को आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा की आशी ट्रेडिंग नाम की कंपनी के नाम से ईरान के रास्ते अफगानिस्तान से लगभग 3000 किलोग्राम हेरोइन का आयात किया गया है।

इसी बीच यह चर्चा का विषय बन चुका है कि क्या मुंद्रा पोर्ट पर ड्रग्स की तस्करी से उद्योगपति गौतम अडानी को भी फायदा हुआ है ?

इस मामले में गुजरात की एक विशेष अदालत ने डीआरआई को यह जांच करने के निर्देश दिए हैं कि मुंद्रा अडानी पोर्ट और उसके प्रबंधन के साथ-साथ उसके प्राधिकारियों को 3000 किलोग्राम ड्रग्स के आयात से कोई लाभ हुआ है।

इस मामले में ड्रग्स की भारी खेप को इंपोर्ट और एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियों की डील में दलाली करने वाले प्रमुख आरोपी राजकुमार पी की रिमांड अर्जी पर सुनवाई करते हुए कहा है कि इस बात की जांच की जानी जरूरी है कि मुंद्रा पोर्ट के प्राधिकरण और अधिकारियों की इसमें क्या भूमिका रही है?

ये पता लगाना जरूरी है कि क्या मुंद्रा अडानी पोर्ट इस तरह से ड्रग्स की खेप की तस्करी के तथ्य से बेखबर था और क्या मुंद्रा अडानी पोर्ट को इस में कोई फायदा हुआ है या नहीं?

कोर्ट ने इस संदर्भ में डीआरआई को मुंद्रा पोर्ट पर ऐसे कंटेनर और खेप की स्कैनिंग के साथ-साथ जांच के तौर तरीकों की प्रक्रिया की जांच की जाने के लिए भी कहा है।

इसके साथ ही कोर्ट के न्यायाधीश ने यह भी कहा है कि डीआरआई द्वारा उठाए गए उन मुद्दों की भी जांच की जानी चाहिए।

जिसमें यह कहा गया है कि ड्रग्स की खेप को मुंद्रा पोर्ट जो कि गुजरात में है, पर क्यों उतारा गया?

जबकि ड्रग्स की खेप को इंपोर्ट करने वाली कंपनी आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा की है। विजयवाड़ा के चारों ओर कई लोग मौजूद हैं।

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