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मोदी सरकार के शासनकाल में देश को बुरे दिन देखने पड़ रहे हैं। डूबती अर्थव्यवस्था और रिकॉर्ड तोड़ बेरोज़गारी के बाद अब उपभोक्ता खर्च में भारी गिरावट दर्ज की गई है।

मीडिया में लीक हुई NSO की एक रिपोर्ट से ख़ुलासा हुआ है कि साल 1973 के बाद पहली बार वित्त वर्ष 2017-18 में देश में उपभोक्ता खर्च में कमी आई है। जानकारों की मानें तो उपभोक्ता खर्च में कमी इस बात का संकेत है कि देश में गरीबी बढ़ रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत वासियों के महीने के औसतन खर्चे में 3.7 प्रतिशत गिरावट आई है। इस तरह की गिरावट 40 साल में पहली बार दर्ज की गई है। जो व्यक्ति 2011-12 में महीने का 1501 रूपये खर्च करता था, वह 2017-18 में 1446 रुपये खर्च कर रहा है।

ख़ुलासाः 45 साल में पहली बार लोगों के पास नहीं है खर्च के लिए पैसे! सरकार ने छुपाई NSO रिपोर्ट

रिपोर्ट में बताया गया है कि इस मामले में ग्रामीण भारत की हालत बेहद खराब है। गांवों में उपभोक्ता खर्च में 8.8 फीसदी की गिरावट आई है। हालांकि गांवों के मुकाबले शहरों की हालत कुछ बेहतर है। पिछले छह साल की बात करें तो शहरों में उपभोक्ता व्यय में महज 2 फीसदी की बढ़त हुई है।

वहीं NSO की इस रिपोर्ट पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने मोदी सरकार पर तंज कसते लिखा- ‘शेखचिल्ली के लतीफ़ों के बारे में ख़ास बात ये थी कि डींगें बड़ी-बड़ी होती थीं, लेकिन असल काम में सब चौपट।

भाजपा सरकार भी डींगें हांकने के लिए डाटा छिपाने में लगी है। तो बहनों-भाइयों नया डाटा कहता है कि लोग गरीब हो रहे हैं। लोगों की खर्च करने की क्षमता घट रही है।’

गाँवों में लोगों के पास खाने पर खर्च करने के पैसे भी कम हो रहे हैं। भाजपा वालों, डाटा को किनारे मत लगाओ, गरीबी को किनारे करो।

आपको दे कि मोदी सरकार पर इस रिपोर्ट को छुपाने के आरोप भी लग रहे हैं। बताया जा रहा है कि राष्ट्रीय सांख्यिक कार्यालय की एक कमिटी ने NSO के आंकड़ों को जून 2019 में जारी करने की मंजूरी दे दी थी, लेकिन सरकार ने इसे जारी होने से रोक दिया।

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