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कोरोना वायरस के बढ़ते हुए असर को देखकर जब लॉकडाउन किया गया तो सबसे बड़ा सवाल उठा कि इतने दिनों तक हिंदू मुसलमान किए बगैर इस देश का मीडिया जिंदा कैसे रहेगा! लेकिन कुछ ही दिनों के अंदर निजामुद्दीन मरकज के बहाने उसी मुसलमानों को रूप में ऐसा निशाना मिल गया कि सांप्रदायिक एजेंडे को लेकर मीडिया फिर से जिंदा हो गया।

अब इस देश का मीडिया हर खबर को ऐसे ही प्रस्तुत कर रहा है जैसे कि कोरोना जैसी महामारी के जिम्मेदार मुसलमान ही हैं। तब्लीगी जमात में शामिल होने वाले मुसलमानों को तो मानो आतंकी के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।

इसी का नमूना है जी उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड द्वारा लगाई गई ये खबर, जिसमें लिखा गया था- फिरोजाबाद में चार तब्लीगी जमाती पॉजिटिव, इन्हें लेने पहुंची मेडिकल टीम पर पथराव। इसका जवाब देते हुए फिरोजाबाद पुलिस ने लिखा- आपके द्वारा असत्य एवं भ्रामक खबर फैलाई जा रही है जबकि जनपद फिरोजाबाद में ना तो किसी मेडिकल टीम एवं ना ही एंबुलेंस गाड़ी पर किसी तरह का पथराव किया गया है आप अपने द्वारा किए गए ट्वीट को तत्काल डिलीट करें।

इस मामले में तो मानो पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोप को खारिज कर दिया और ज़ी मीडिया को ख़बर डिलीट करने पर मजबूर कर दिया लेकिन दिन भर टेलीविजन पर नफरत फैला रहे एंकरों का क्या इलाज है ?

मुसलमानों को आतंकी बताकर महामारी के इस दौर में भी जहर उगलने वाले पत्रकारों का क्या इलाज है ? इन्हीं सवालों पर इस देश की सरकार को सोचना होगा और निष्पक्ष होते हुए तमाम दंगाई मीडिया पर कार्यवाही करनी होगी।

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