मोदी सरकार के तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन और तेज होता दिख रहा है। फिर सवाल उठता है कि, जब किसान ही इस कानून के खिलाफ सड़कों पर हैं तो मोदी सरकार ने किसको खुश करने में लिए कानून बनाया है?

मंगलवार को 27 अक्टूबर को दिल्ली में ऑल इंडिया किसान संघर्ष को-ऑर्डिनेशन कमेटी की बैठक हुई।

इस बैठक में बैठक में शिरकत करने यह फैसला किया गया कि संसद द्वारा पारित तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ 5 नवंबर को देशभर में किसान दिन 12 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक चक्का जाम करेंगे।

वहीं 26 और 27 नवंबर को देशभर के किसान दिल्ली चलो अभियान के तहत राजधानी में इस कानून का विरोध करने के लिए जुटेंगे।

राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के संयोजक बीएम सिंह ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि केंद्र सरकार के 3 कृषि से जुड़े काले कानून के खिलाफ तो आंदोलन होगा ही।

साथ ही बिजली बिल और पंजाब के अंदर मालगाड़ी की आवाजाही को रोककर उसका ठीकरा किसानों पर फोड़ा जा रहा है। उसके खिलाफ भी ये आंदोलन होगा।

बीएम सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार बिजली कानून में बदलाव कर पांच सितारा होटलों में उठने वाले प्रति यूनिट बिजली बिल के समान किसानों से भी बिल वसूलना चाहती है।

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