कल किसान संगठनों और मोदी सरकार के केंद्रीय मंत्रियों के बीच आठवें दौर की बैठक हुई है। लेकिन इस बैठक में भी सरकार और किसान नेताओं के बीच कोई सहमति नहीं बन पाई है।

जहां केंद्रीय मंत्रियों ने साफ तौर पर कहा कि हम कानून वापस नहीं लेंगे। वहीँ किसान नेताओं ने भी उन्हें चेतावनी देते हुए कहा है कि या मरेंगे या जीतेंगे।

इसी बीच अब केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के गांव से दर्जन भर किसान सरकार के खिलाफ चल रहे इस आंदोलन में शामिल होने पहुंचे गए हैं।

कृषि मंत्री के गांव से आए किसानों का कहना है कि किसान यह प्रदर्शन इसलिए कर रहे हैं। क्योंकि वह कानूनों से परेशान है। अगर यह कानून उनके पक्ष में होते तो वह दिल्ली में आकर आंदोलन क्यों करते।

अब किसानों ने हर दिशा से पीएम मोदी को घेर लिया है। जिस तरह से भगवान राम ने रावण की लंका को घेरा था। उस वक़्त जो हाल रावण का हुआ था। वही हाल आज पीएम मोदी का होने जा रहा है।

हम कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से यही कहना चाहते हैं कि अगर आप किसानों के हित में हैं। तो उनके लिए खड़े हो, अपना पद छोड़ दीजिए और किसानों के हित की बात कीजिए। अन्यथा आप भी जब ग्वालियर में आएंगे तो वहां पर आपको भी घेरा जाएगा।

मोदी सरकार कह रही है कि यह कानून किसानों के हित के लिए लाए गए हैं। लेकिन यह कानून अगर किसानों की आत्महत्या का कारण बनते हैं। तो उसमें किसका हित है।

किसानों का कहना है कि उन्होंने दिल्ली आने से पहले ग्वालियर में भी कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के खिलाफ विरोध किया है। ताकि उनको पता चले कि जहां पर वह खुद रहते हैं वहां लोग इन कृषि कानूनों के बारे में क्या सोचते हैं। लेकिन कृषि मंत्री मध्यप्रदेश छोड़कर दिल्ली भाग आए हैं।

मध्य प्रदेश से आए इन किसानों ने कहां है कि हम कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की ऐसी स्थिति कर देंगे कि वह अब मध्य प्रदेश से चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।

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