महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे की सरकार आते ही महराष्ट्रवासियों को शुक्रवार को पहला झटका लगने की संभावना देखी जा रही है।

दरअसल, महाराष्ट्र में इसी महीने से बिजली के बिल में 10 से लेकर 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी जा सकती है, जिसमे रेजिडेंशियल, कमर्शियल और इंडस्ट्रियल जैसे इलाके शामिल हैं।

जानकारी के मुताबिक, महाराष्ट्र इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन ने 1 जून से बिजली कंपनियों को फ्यूल एडजस्टमेंट चार्ज(एफएसी) लगाने की अनुमति दे दी थी।

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले दो सालों से कोरोना के चलते बिजली के बिल में फ्यूल एडजस्टमेंट चार्ज को नहीं शामिल किया जा रहा था।

मगर अब माना जा रहा है कि सरकार के इस फैसले से मुंबई में बिजली सप्लाई करने वाली बेस्ट के 10.5 लाख, 7 लाख टाटा पॉवर, 29 लाख अडानी इलेक्ट्रिसिटी और एमएसईडीसीएल के 2.8 करोड़ ग्राहकों पर सीधा असर पड़ेगा।

आपको बता दें कि एफएसी की गणना मार्च, अप्रैल और मई के महीने के लिए की जाएगी। जबकि इसे नवंबर तक भरना होगा। पहली एफएसी जुलाई के बिल में आएगी।

ग्राहकों के बिल के स्लैब के मुताबिक इसका आंकलन किया जाएगा। हालांकि, औसत वृद्धि तकरीबन एक प्रतिशत के आसपास होगी।

जहां आम उपभोक्ता सरकार के इस फैसले से खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है, वहीं अधिकारियों ने इम्पोर्टेड कोयले की कीमत में वृद्धि और गैस आधारित बिजली स्टेशनों को चलाने की परिचालन लागत का हवाला देते हुए बढ़ोतरी को उचित ठहराया है।

एमीआरसी के अधिकारी का कहना है कि इम्पोर्टेड कोयले की समस्या सिर्फ मुंबई या महाराष्ट्र में नहीं है। बल्कि यह दिक्कत पूरे देश मे है।

जून में, केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आर के सिंह द्वारा की गई बात को ध्यान में रखें तो भारत में बिजली की मांग बढ़ती रहेगी और आगे चलकर काफी हद तक 205 गीगावॉट से ऊपर रहेगी।

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