पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री के राज्य गुजरात से एक बड़े घोटाले की खबर आ रही है. लगभग 6 हजार करोड़ रुपये के कोयला घोटाले की खबर ने देश की राजनीति को हिला कर रख दिया है.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गुजरात सरकार की एजेंसियों ने छोटे और मध्यम श्रेणी के उद्योगों के नाम पर कोयला मंगाया और इसे महंगे दामों पर दूसरे राज्यों को बेच दिया.

कांग्रेस ने इस मुद्दे को लपकते हुए इसके जांच की मांग कर दी है और इसे चारा घोटाले का भी बाप बता दिया है.

कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने इस मुद्दे पर ट्वीट करते हुए लिखा है कि “गुजरात सरकार में 6000 करोड़ का कोयला घोटाला.

खदान से आया 60 लाख टन कोयला और हो गया गायब. भाजपा की सरकार ने 04 प्राइवेट कंपनियों को कोयला लाने को अधिकृत किया.

इनमें से 03 का पता नकली निकला. शायद इसका जवाब आएगा न कोई कोयला लाया और न कोयला आया. मामला बंद और पैसा हजम….

वहीं महाराष्ट्र कांग्रेस के नेता और पूर्व सांसद संजय निरुपम ने इस मुद्दे पर ट्वीट करते हुए इसे चारा घोटाले से भी बड़ा बताते हुए कोयला घोटाले को चारा घोटाले का बाप बताया है.

निरुपम ने कहा कि खदान से निकला 60 लाख टन कोयला और बीच रास्ते से हो गया गायब. इसकी जांच जरुरी है.

देश के प्रतिष्ठित मीडिया समूह दैनिक भास्कर ने दावा किया है कि गुजरात में लगभग 6000 करोड़ का यह घोटाला सामने आया है.

पिछले 14 सालों में गुजरात में राज्य के छोटे और मध्यम श्रेणी के उद्योगों को कोयला देने की बजाय दूसरे राज्यों को बेच दिया गया है और 05 से 06 हजार करोड़ रुपये का घोटाला किया है.

रिपोर्ट्स के अनुसार बताया गया है कि कोल इंडिया के खदानों से जिन उद्योगों के लिए कोयला निकाला गया, वो कोयला वहां तक पहुंचा ही नहीं बल्कि इन कोयलें को दूसरे राज्यों को बेच दिया गया और उससे लगभग 6 हजार करोड़ रुपये की मोटी रकम की उगाही की गई.

गुजरात के छोटे व्यपार और उद्योगों के लिए 60 लाख टन कोयला जिसकी कीमत 3000 रुपये प्रति टन के हिसाब से 1800 करोड़ रुपये होती है इसे छोटे व्यापारियों को बेचने की बजाय दूसरे राज्यों में 08 से 10 हजार रुपये प्रति टन के हिसाब से बेचकर कालाबाजारी की गई.

दैनिक भास्कर समूह द्वारा इस घोटाले के पर्दाफाश के बाद भारतीय जनता पार्टी में बेचैनी देखी जा रही है.

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