दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन को समर्थन देने के लिए अब उत्तर प्रदेश में भी किसानों ने भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

आलम यह बन चुका है कि अब कई गाँवों में भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं के एंट्री ही बंद कर दी गई है।

हाल ही में भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष नरेश टिकैत ने मुजफ्फरनगर में आयोजित की गई एक महापंचायत में यह ऐलान किया था कि अगर किसी भी कार्यकर्ता ने भाजपा नेताओं को किसी समारोह के लिए आमंत्रित किया तो उसे दंडस्वरूप 100 लोगों को खाना खिलाना पड़ेगा।

इस मामले में धर्म गुरु और सामाजिक कार्यकर्ता आचार्य प्रमोद ने ट्विटर के जरिए किसानों का समर्थन करते हुए मोदी सरकार पर तंज कसा है।

उन्होंने ट्विटर पर लिखा है कि “गांव में घुसने पर अभी चमचों को खदेड़ा जा रहा है। एक दिन शहंशाह को भी रोका जाएगा। किसान एकता जिंदाबाद”

दरअसल प्रधानमंत्री ने बीते साल नवंबर से शुरू हुए किसान आंदोलन पर दुख जरूर जाहिर किया है। लेकिन अभी तक किसानों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं जानने की कोशिश नहीं की है।

जिसके चलते ही कई राज्यों में पीएम मोदी का भी बढ़-चढ़कर विरोध किया जा रहा है। कई जगहों पर पीएम मोदी, अडानी और अंबानी के पुतले फूंके जा रहे हैं।

कल उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के सोरम गांव में भाजपा नेताओं और किसानों के बीच झड़प की खबर भी सामने आई है। इस दौरान केंद्रीय मंत्री डॉ संजीव बालियान भी वहां मौजूद थे।

माना जा रहा है कि अभी तक भाजपा नेताओं का विरोध किया जा रहा है। एक वक्त ऐसा भी आ सकता है कि लोग पीएम मोदी को भी लोगों के ऐसे ही विरोध का सामना करना पड़ सकता है।

दरअसल पहले से ही किसान आंदोलन ने लोगों के बीच भाजपा की छवि को बदलने का काम किया है। कृषि कानूनों को अगर रद्द नहीं किया जाता। तो भाजपा को आने वाले चुनाव में भी हार का सामना करना पड़ सकता है।

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